राजेश भाटिया/ अनिल अग्रवाल(मथुरा)।
फतेहपुर सीकरी रजबहा में पानी का बहाव कम होता तो इनोवा सवारों की जान बचाई जा सकती थी। तेज बहाव के चलते ग्रामीण एवं युवा हिम्मत नहीं जुटा सके। रजबहा के बहाव को कम कराने के लिए पानी को बंद कराया गया। उसके बाद ग्रामीण रजबहा में कूदे। लेकिन किसी को बचाया नहीं जा सका।
मथुरा-भरतपुर मार्ग स्थित मकेरा पुलिया पर हुए हादसे के बाद मौके पर पहुंचने वालों में मार्ग पर दौड़ लगा रहे युवा थे। उसके बाद पास के मोतीनगर के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार उनको चीख-पुकार सुनाई दी थी।
माना जा रहा है कि इनोवा चालक हरीशचंद्र की चीख-पुकार को मोतीनगर वासियों ने सुना। कुछ ही समय में मौके पर भीड़ जुट गई थी। लेकिन रजबहा के तेज बहाव के चलते कोई उसमें जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
इन ग्रामीणों ने पास के ही गांव मकेरा में हादसे की खबर दी। मकेरा से भी लोग मौके पर जुट गए। थाना मगोर्रा के प्रभारी हरीशवर्धन सिंह भी पहुंच गए। बंडपुरा की तरफ से रजबहा में आ रहे पानी को बंद कराया गया।
पानी का बहाव कम होने पर गांव मकेरा के बांकेलाल, धीरज, हंसा, पुष्पेंद्र, जग्गो, विनोद और सोनू रजबहा में कूदे। तब तक काफी देर हो चुकी थी। इनोवा से नौ शवों को बाहर निकाला गया। चालक का शव कुछ दूरी पर मिला।
नहीं खुल पाया था कार का गेट
दरअसल जिस इनोवा में यह परिवार सवार था उसमें केवल चालक साइड वाली खिड़की ही खुल पाई थी। बाकी गेट नहीं खुले थे। माना जा रहा है कि कार में सवार लोगों ने गेट खोलने की कोशिश की होगी लेकिन गेट खुल ही नहीं पाए। हां चालक हरीशचंद्र ने जरूर अपनी साइड वाला दरवाजा खोल लिया था। वह बाहर तो निकला लेकिन तेज बहाव में बह गया। चालक का शव भी गाड़ी से दूर मिला था।