तीन सरकारी बैंकों बैंक आफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय के निर्णय के खिलाफ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने मंगलवार को आगरा के संजय प्लेस स्थित बैंक आफ बड़ौदा क्षेत्रीय कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया।
यूएफबीयू के एमएम राय ने कहा कि विलय के प्रस्ताव से बैंकों की समस्या सुलझ नहीं सकती। बैंकों की सबसे बड़ी समस्या नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) की है। इन तीनों ही बैंकों में एनपीए का 80 हजार करोड़ रुपया फंसा हुआ है। एकीकरण के बाद एनपीए की रकम वसूलने में काफी परेशानी होगी। अमरदीप कौशिक ने कहा कि स्टेट बैंक में विलय प्रक्रिया के बाद एनपीए की राशि में बढ़ोतरी हुई है।
एकीकरण के बाद बैंक शाखाओं का विलय किया जाएगा, इससे सभी तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। यूनियन सदस्य गोविंद माहेश्वरी ने कहा कि विलय प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और कहा कि विलय से बैंकों की काम करने की क्षमता पर असर नही पड़ेगा, बल्कि इससे आम ग्राहकों की परेशानी और बढ़ जाएगी। विरोध प्रदर्शन के दौरान अंकित सहगल, शैलेंद्र झा, अशोक सारस्वत, प्रेमचंद लवानिया आदि मौजूद रहे।