मथुरा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) महज दिखावा साबित हो रहा है। तस्वीर का स्याह पहलू यह है कि स्कूलाें में आरक्षित सीटों के मुकाबले बेहद कम बच्चों के ही प्रवेश अब तक हो पाए हैं। ऐसे में गरीब बच्चे बेहतर शिक्षा हासिल करेंगे यह महज सपना सरीखा है।
मथुरा में 100 से अधिक सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड द्वारा संचालित विद्यालय है। आरटीई में प्रावधान है कि स्कूल की पहली कक्षा की कुल सीटों का 25 फीसदी गरीब वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होगा। इन सीटों पर बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा।
ऐसे में मथुरा के 100 विद्यालयों में लगभग दस हजार सीटों का 25 फीसदी 2500 सीटें होती हैं। इन आरक्षित सीटों में अभी तक मात्र 26 छात्रों ने प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की है। हालांकि अभी दूसरे चरण की प्रक्रिया का लॉटरी खुलने जा रही है, लेकिन आरक्षित सीटों के मुकाबले आवेदनों की संख्या में मात्र 175 है। जो ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है।
जटिलता के कारण नहीं बढ़ पाती संख्या
मथुरा। आरटीई अधिनियम में ऑनलाइन आवेदन की साइट ही कई दिनों तक नहीं खुली। इतना ही नहीं गूगल मैप से लिंक न होने के चलते विद्यालयों के नाम ही प्रदर्शित नहीं हुए। ऑफलाइन आवेदनों के लिए भी परिजन परेशान रहे।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम में अभी तक 26 छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। दूसरे चरण की लॉटरी 24 अप्रैल को खोली जाएगी। इस बार 175 आवेदन कार्यालय को प्राप्त हुए है।
संजीव कुमार सिंह, बीएसए मथुरा।