फिरोजाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज तीसरी बार सुहागनगरी आ रहे हैं। इस बार शहर से दूर पुलिस लाइन में उनका कार्यक्रम है। प्रशासन का आयोजन होने से चकाचौंध वाली व्यवस्थाएं की गई हैं। बुनियादी सुविधाओं का सच कुछ और ही है।
सड़कों पर गड्ढे हैं, पूरा शहर गंदगी से अटा है। सर्विस रोड से गलियों तक उबड़-खाबड़ रास्ते हैं। बड़ी परियोजनाओं के काम की गति धीमी है। करोड़ों का बजट मिलने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। पुलिस लाइन का कार्यक्रम सरकार के एक साल पूरे होने को समर्पित है। बेशक एक साल की उपलब्धियां गिनी जा सकती हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाएं अब वादों की कसौटी पर हैं।
पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नगर निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट मांगने पीडी जैन इंटर कालेज के मैदान पर आए थे। दूसरी बार इस कालेज के मैदान पर आयोजित सेवा उत्सव कार्यक्रम में आए थे। बुधवार को वह तीसरी बार यहां आ रहे हैं।
पुलिस लाइन में जिला प्रशासन ने लाभार्थी सम्मेलन आयोजित किया है। एक साल में सरकार की योजनाओं का लाभ लेने वाले लाभार्थी बुलाए गए हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा इस लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि पहली बार वह सरकारी आयोजन में आ रहे हैं और वह भी सरकार का एक साल पूरा होने पर।
शहर से आठ किलोमीटर दूर पुलिस लाइन का अलग ही लुक है जहां सब कुछ हरा-भरा नजर आता है। बुनियादी समस्याएं तो शहर के हिस्स में हैं। यहां मौजूदा हालतों पर चर्चा की जाए तो व्यवस्थाएं पटरी से उतरी हुई हैं। मुख्यमंत्री का गड्ढा मुक्त सड़कों का फरमान शहर की सड़कों पर दम तोड़ रहा है। पूरा शहर खुदा पडा है।
सर्विस रोड से लेकर मुख्य रास्ते तक उखड़े पडे हैं। गली मोहल्लों में यह हाल है ही पाश कालोनी विभव नगर, सुहाग नगर कालोनी में हालत और भी गंभीर हैं। सर्विस रोड़ पर बडे-बडे गड्ढे हैं। कूडे के ढेर तक नहीं उठाए जा रहे नाले-नालियां चौक हैं।
स्वास्थ्य विभाग को करोड़ों रुपये का बजट मिल रहा है लेकिन जीवन रक्षक दवाएं अस्पताल में नहीं हैं। वर्तमान में यह स्थिति है कि जिला अस्पताल में सर्दी-जुकाम के सीरप नहीं है। डाक्टर दनादन बजार की दवाएं लिख रहे हैं। मरीज के लिए पर्चा एक रुपये का जरूर है लेकिन मरीजों को बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड रही हैं। एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं हैं। आए दिन दवाओं को लेकर हंगामे की स्थिति बनती है।
663 करोड़ की जेड़ा झाल परियोजना शहर को गंगाजल दिलाने के लिए मार्च 2013 में बनी। इस बड़ी योजना पर काम की गति काफी धीमी है। तीन बार नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना नगर विधायक मनीष असीजा के साथ परियोजना का निरीक्षण कर चुके हैं। पचास करोड़ रुपये शासन से और मिल गए हैं लेकिन काम की गति इतनी धीमी है कि लगता नहीं मार्च 2018 के अंत तक भी गंगाजल शहर के लोगों को मिल पाएगा।
साढे 19 करोड़ की लागत से सौ शैय्या का महिला अस्पताल बने चार साल से अधिक का समय हो गया लेकिन अब अस्पताल चालू नहीं हो सका है। जबकि प्रभारी मंत्री नीलकंठ तिवारी, स्वास्थ्य राज्यमंत्री, केबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल भी इस अस्पताल का निरीक्षण करके जल्द चालू कराने का आश्वासन दे चुके हैं। 1996 में बनी ट्रांसपोर्ट नगर योजना अब तक फाइलों में कैद है।
स्वच्छ भारत मिशन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों की प्राथमिकता पर हैं। ओडीएफ अभियान की स्थिति का सच आंकडों में कुछ और हकीकत में कुछ और हैै। लक्ष्य के अनुसार शौचालय बन नहीं सके हैं। 613 गांव ओडीएफ होने हैं और अब तक मात्र 175 गांव ओडीएफ हुए हैं। दो लाख 24 हजार शौचालय बनने हैं मात्र 91 हजार शौचालय बने हैं। साफ-सफाई स्थिति प्रचार-प्रसार में अधिक जमीन पर हकीकत में कुछ और दिखाई देती है। जबकि स्वच्छता पर जिला प्रशासन से लेकर नगर निकायों तक करोड़ों रुपया खर्च कर दिया गया है।