कुसमरा। कथा साहित्य किसी भी तरह का धर्म साहित्य नहीं है। दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। इस अंतर को सभी को समझना चाहिए। यह प्रवचन कथावाचक राजेश्वरी बौद्ध ने दिए।
गांव हिरौली में मौर्य शाक्य समाज के संयुक्त तत्वावधान में चल रही भगवान बुद्ध की कथा के दूसरे दिन अंगुली माल का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि इतना हिंसक होने के बावजूद वह भगवान बुद्ध की शरण में आया तो उसने हिंसा का परित्याग कर दिया और एक धर्मी व्यक्ति बन गया।
उन्होंने कहा कि हम कथा साहित्य को धर्म साहित्य समझने की गलती न करें, क्योंकि कथाएं धर्म साहित्य का हिस्सा नहीं होतीं। कर्म का सही या गलत होना भी समय पर निर्भर करता है। रामचरन शाक्य, सौदान सिंह, प्रमोद शाक्य, जवाहर लाल, राधेश्याम शाक्य, मेवाराम शाक्य, उदयवीर शाक्य, विमल शाक्य, रामदीन शाक्य, सुनील शाक्य, अमर सिंह शाक्य, ताराचंद्र मौजूद रहे।