मैनपुरी। दहेज में स्कार्पियो की मंाग पूरी नहीं होने पर युवती की हत्या के आरोपी पति को एफटीसी द्वितीय न्यायालय के जज तैयब अहमद ने आजीवन कारावास दिया है। अदालत ने पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं साक्ष्य के अभाव में सास और ससुर को बरी कर दिया गया।
एटा के थाना जैथरा के नखतपुर निवासी रनवीर सिंह यादव की पुत्री मंजू की शादी तीन नवंबर 2014 को कमल सिंह यादव निवासी हीरो होंडा एजेंसी जीटी रोड कुरावली के साथ हुई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक रनवीर का आरोप था कि दहेज में स्कार्पियो की मांग को लेकर पति कमल, ससुर उमेश तथा सास कुसुमा देवी ने मंजू का उत्पीड़न शुरू कर दिया।
दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर मंजू की नौ अगस्त 2015 को हत्या कर दी गई। उसका शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने पिता की तहरीर पर पति और सास-ससुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके जांच शुरू की। पुलिस द्वारा आरोपपत्र दाखिल करने पर इस मुकदमे की सुनवाई एफटीसी द्वितीय के जज तैयब अहमद की न्यायालय में हुई।
सहायक शासकीय अधिवक्ता शरवीर सिंह यादव तथा प्रेमचंद्र निगम और बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। पुलिस के समाने गवाही देने वाले कई लोग अदालत में मुकर भी गए। वहीं शासकीय अधिवक्ता ने आरोपियों को कड़ी सजा देने की दलील दी। अदालत ने पति को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास दिया। पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं सास तथा ससुर को अपराध साबित नहीं होने पर न्यायालय ने इन दोनों को बरी कर दिया है।
बता दें कि मंजू का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला था। पोस्टमार्टम करने वाले डॉ मुवीन कुमार ने अदालत में गवाही में बताया कि मंजू का गला दबाने से उसके गले की हड्डी टूट गई थी। जिससे उसकी मौत हुई। पिता ने दहेज हत्या की रिपोर्ट लिखाई थी। डॉ की गवाही से हत्या का मामला मानकर सजा सुनाई गई है।
वहीं न्यायालय में झूठी गवाही देने पर मंजू के पिता तथा तहरीर लिखने वाले नखतपुर के ही सुरजीत कुमार के खिलाफ एफटीसी जज ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। न्यायालय के पेशकार को दोनों के खिलाफ झूठी गवाही देने, अदालत का समय बर्बाद करने के आरोप में अदालत में ही मुकदमा चलाने के निर्देश दिए हैं।