आगरा। बटुआ में विजिटिंग कार्ड, रुपये, एटीएम कार्ड और अन्य कागजात ठूंसे। बटुआ हुआ भारी और जेब में रखकर घंटों बैठने काम। यह आदत लोगों के कूल्हे की मांसपेशियों में दर्द दे रहा है। ऐसे मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। एसएन मेडिकल कालेज के फिजियोथेरेपी विभाग में इस समस्या से 25-30 फीसदी मरीज रहते हैं।
विभाग में रोजाना औसतन 100 मरीज रहते हैं। इनमें 30 फीसदी तक ऐसे मरीज हैं, जिनके कूल्हे की मांसपेशियों में दर्द रहता है। खास बात इससे पहले मरीज हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखा चुका होता है, एक्सरे की जांच में सभी सामान्य निकलता है। विभाग के डा. अतुल शर्मा बताते हैं कि कूल्हे की मांसपेशिया लचकदार होती है। टाइट कपड़े पहनने और मोटा पर्स रखकर लगातार बैठने से निश्चित स्थान की कूल्हे की ग्लूटियल मांसपेशियां दबी रहती हैं। लगातार ऐसा होने से प्रेशर जोन बन जाता है और दर्द शुरू होने लगता है। कंप्रेशर इंजरी का खतरा भी रहता है। ओपीडी में आने वाले अधिकांश लोग कंप्यूटर पर कार्य करने वाले, आफिस के लिपिक, मोटरसाइकिल-कार चलाने वाले ज्यादा रहते हैं।
ये भी होने लगती परेशानी
बैठकर उठने के बाद पैरों में झनझनाहट
कूल्हे के निश्चित स्थान पर सुन्नपन
नसों की परेशानी शुरू हो जाना
ये करें उपाय:
कंप्यूटर-बैठकर काम करते वक्त बटुआ बाहर निकालें
मुलायम और आरामदायक बटुए का ही इस्तेमाल करें
बटुआ में अनावश्यक कागजात-प्लास्टिक कार्ड न रखें