बेसिक शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय की ओर से फर्जी घोषित किए गए अभ्यर्थियों की सूची में शामिल 24 शिक्षकों की 12 मई को सेवाएं समाप्त कर दीं। एक जुलाई 2020 को बीएसए की ओर से शाहगंज थाने में इन शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। वेतन रिकवरी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बर्खास्त शिक्षक कोर्ट चले गए। बाद में कोर्ट के आदेश पर विश्वविद्यालय ने जिन 2823 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी घोषित किए थे, वह आदेश स्थगित कर दिया।
पक्ष रखने वाले 814 में से दो को छोड़कर बाकी को फर्जी घोषित किया
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपना पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों में से दो को छोड़कर बाकी 812 को 29 जुलाई को फर्जी घोषित कर दिया था। दो अभ्यर्थी ऐसे थे, जो सत्र 2004-05 की परीक्षा में एक्स-स्टूडेंट के रूप में शामिल हुए थे, वह संबंधित सत्र के नहीं थे।
सात अभ्यर्थियों के साक्ष्य का परीक्षण किया जाएगा
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि अधिवक्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना पक्ष रखने वाले 812 में से महज सात अभ्यर्थियों के साक्ष्य का परीक्षण फिर से करना है। इसके लिए एक माह का समय दिया गया है। वहीं, टेंपर्ड सूची में शामिल अभ्यर्थियों की जांच करके चार माह के अंदर रिपोर्ट देनी है। कोर्ट के आदेश का अध्ययन करके कोई कदम उठाया जाएगा।