एटा। किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा रहे गोवंश के लिए जिले के 21 स्थान निश्चित किए गए है, जहां उनके रहने की व्यवस्था की गई है। जिनमें से जैथरा के कान्हा पशु आश्रय केंद्र में क्षमता से दो गुना गोवंश पहुंच गए हैं। जिससे गोवंश का रखरखाव कर रहे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में एटा और जलेसर की दो गोशाला तथा जैथरा, राजा का रामपुर, अलीगंज में तीन कान्हा पशु आश्रय केंद्र के अलावा 16 अलग अलग स्थानों पर जिले भर में आवारा गोवंश की संख्या में शामिल पशुओं के रहने का ठिकाना बनाया गया है। जबकि गोवंश की देखरेख करने के लिए शासन स्तर से एक रुपये का भी बजट स्वीकृत नहीं हुआ है। अभी तक जिले में इन गोवंश की देखरेख ग्राम प्रधान तथा नगर निकाय के कंधों पर है। इसमें भी सबसे अधिक परेशानी की बात यह है कि जैथरा के कांहा पशु आश्रय केंद्र में करीब 180 गोवंश पहुंच गया है, जबकि उसकी क्षमता 100 गोवंश की है। इसलिए केंद्र पर कार्य कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि भूषे से लेकर साफ सफाई तक की परेशानी हो रही है।
- समिति में यह लोग है शामिल
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार गोवंश की देखरेख के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें विकास खंड अधिकारी को अध्यक्ष, पशु अधिकारी को उपाध्यक्ष ओर ग्राम विकास अधिकारी को समिति का सचिव बनाया गया है। जिनकी निगरानी में गोवंश की देखरेख की जा रही है।
- आठ लाख का भेजा है प्रस्ताव
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक सरकार की ओर से कोई बजट नहीं मिला है। प्रति गोवंश पर 30 रुपये का खर्च आ रहा है। जबकि उनके पास दो हजार करीब गोवंश गोशाला और पशु आश्रय केंद्र के अलावा अन्य अस्थाई ठिकानों पर पहुंच गया है। जिनके लिए शासन से आठ लाख रुपये के बजट की मांग की गई है।
आंकड़ों पर नजर
21 स्थानों पर जिले में रखा जा रहा है गोवंश
02 गोशाला है जिले में
03 पशु आश्रय केंद्रों में भी रह रहा गोवंश
02 हजार करीब गोवंश की पहुंची संख्या
08 लाख रुपये की शासन से की गई मांग
जिले में गोवंश के लिए 21 ठिकाने बनाए गए है, जिनमें करीब दो हजार गोवंश पहुंच गया है। बजट के अभाव में अभी तक ग्राम प्रधान और नगर निकाय जनसहयोग से ही गोवंश के खानपीन की व्यवस्था कर रही है। हमने सरकार ने आठ लाख रुपये की मांग की है।
केपी सिंह, जिला मुख्य चिकित्साधिकारी