गन्ना किसानों की उम्मीद जल्द पूरी होने वाली है। लंबे समय से बकाए के भुगतान की आस लगाए बैठे किसानों की उम्मीद पूरी होने वाली है। प्रदेश सरकार ने सॉफ्ट लोन योजना के तहत न्यौली चीनी मिल को 34.62 करोड़ की धनराशि दे दी है।
न्यौली चीनी मिल पर गन्ना किसानों का 40 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है। भुगतान के लिए किसान आंदोलन करते रहे। तत्कालीन जिलाधिकारी के विजयेंद्र पांडियन ने सख्त रुख अपनाते हुए चीनी मिल के दो अधिकारियों को 3 दिन के लिए हवालात भेजा था। इसके बाद चीनी मिल ने किसानों के 3 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था। जिला प्रशासन ने मिल की 65 हजार कुंतल चीनी को जब्त भी कर लिया। उसके बाद भी किसानों के बकाए का भुगतान नहीं हो पा रहा था। पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने सॉफ्ट लोन योजना के तहत न्यौली मिल को 33 करोड़ रुपये देने की स्वीकृति दे दी, लेकिन धनराशि नहीं मिली। अब प्रदेश सरकार ने प्रदेश की 40 चीनी मिलों को करोड़ों रुपए धनराशि को दी गई है। न्यौली चीनी मिल भी इस योजना में शामिल है। स्वीकृत की गई 35 करोड़ धनराशि की एवज 34 करोड़ 62 लाख रुपये प्रदेश सरकार ने संबंधित बैंक को दे दिए हैं जिससे कि गन्ना किसानों के खातों में बकाए के भुगतान की धनराशि जल्द भेजी जा सके।
अब किसानों का वर्ष 2016 और वर्ष 2017 के बकाए का भुगतान शीघ्र हो सकेगा। सरकार ने 62 लाख रुपये की धनराशि पिछले सप्ताह न्यौली चीनी मिल को दे दी है। यह राशि सहायता राशि के रूप में दी गई है। जो कि गन्ना की खरीद पर प्रदेश सरकार अनुदान के रूप में घोषित करती है। गन्ना विभाग भी अब किसानों के बकाए के भुगतान के लिए प्रयासरत हो गया है। चीनी मिल और गन्ना विभाग के अधिकारी गन्ना किसानों का पूरा विवरण बैंक को भेज रहे हैं।
सीधे खातों में जाएगी धनराशि
कासगंज। किसानों के बकाए भुगतान में कहीं मिल प्रशासन गड़बड़ी न करें इसके लिए सरकार ने भुगतान की नई योजना बनाई है। सरकार के निर्देश पर सॉफ्ट लोन योजना के तहत मिली धनराशि बैंकों के माध्यम से सीधे गन्ना किसानों के खाते में भेजी जाएगी। इसके लिए बैंक मिल प्रशासन से ब्यौरा जुटाएंगी। गन्ना विभाग को अपनी रिपोर्ट बैंकों के माध्यम से शासन को भेजनी होगी।
किसानों की बात
- न्यौली मिल पर आठ लाख रुपये वर्ष 2016 और 17 की गन्ना खरीद की एवज का बकाया है। यह धनराशि अभी तक हमें नहीं मिल सकी है। सॉफ्ट लोन योजना के तहत धनराशि मिलने की खबर से उम्मीदें जाग उठी हैं। हरीश कुमार, गन्ना किसान, बघेला
-सहायता राशि की धनराशि मिलने की सूचना से उम्मीद थी कि आंशिक रूप से 6 लाख रुपये के बकाए का भुगतान हो सकेगा, लेकिन अब सॉफ्ट लोन योजना के तहत जो धनराशि मिली है। उससे पूर्ण भुगतान की उम्मीद जगी है। प्रेमपाल, गन्ना किसान, दीपपुर
प्रशासन ने तेज की चीनी बिक्री की पहल
कासगंज। किसानों के बकाए का शत-प्रतिशत भुगतान हो सके इसके लिए जिला प्रशासन ने चीनी मिल में भंडारित चीनी की बिक्री तेज कर दी है। अब तक 30 हजार बोरी से अधिक चीनी की बिक्री की जा चुकी है। चीनी से मिलने वाली धनराशि सीधे किसानों के खातों में भेजी जा रही है।
-प्रदेश सरकार ने बैंकों के जरिए धनराशि किसानों के खातों में भेजने के निर्देश दिए हैं। शासन से 34 करोड़ 62 लाख रुपये की राशि बैंकों को मिल गई है। अब बैंकों के जरिए जल्द ही किसानों के बकाए का भुगतान कर दिया जाएगा। ओम प्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी
किसान बोले-
- सरकार का ध्यान किसानों की हालत पर नहीं है। किसान लगातार बर्बाद हो रहे हैं। गन्ना की खेती घाटे का सौदा बन रही है। पिछली साल जो गन्ना चीनी मिल को दिया था उसका भुगतान आज तक नहीं मिला है। खाद, बीज महंगे हो रहे हैं। अंतराम, निवासी गुलाबगढ़ी।
- गन्ना के बकाए भुगतान को लेकर कई बार प्रशासन और चीनी मिल के दरवाजे पर दस्तक दे चुके हैं, लेकिन अभी तक बकाए का भुगतान नहीं मिला है। जब किसान के हाथ में पैसा ही नहीं होगा तो वह कैसे अपने घर परिवार को चलाएगा। यदि सरकार नहीं देखेगी तो कौन देखेगा- माधो सिंह, निवासी सिरौली।
- मेरा कर्ज भी माफ नहीं हुआ है। बैंक प्रबंधक ने कर्ज माफ करने से मना कर दिया है। कई बार अधिकारियों को शिकायत दी है। मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी है, लेकिन आज तक कर्ज माफी नहीं हो पाई है। अजब सिंह, निवासी बनीपुर पुख्ता।
- खेतों की सिंचाई के लिए न बिजली मिल रही है और न ही रजवाहों में पानी है। गांव में बिजली विभाग ने बिना विद्युत कनेक्शनों के ही किसानों के बिल जारी कर दिए हैं। आखिर विभाग किस बात का बिल भेज रहा है। रामखिलाड़ी, निवासी कुढ़ार।