मैनपुरी। निजी स्कूलों में अभिभावकों से अप्रत्यक्ष रूप से भी रुपये वसूले जाते हैं। जिसके चलते अभिभावकों को काफी परेशानी से जूझना पड़ता है। स्कूलों में कभी सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर तो कभी खेलकूद और परीक्षा के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। अभिभावक चाह कर भी इसका विरोध नहीं कर पाते हैं। विद्यालय संचालक बच्चे को फेल करने की धमकी देते हैं।
निजी स्कूलों में स्कूल संचालकों द्वारा न केवल प्रवेश के समय बल्कि वर्ष भर अभिभावकों से अप्रत्यक्ष रूप से भी धन वसूली की जाती है। विद्यालय संचालक वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के रूप में अपने कालेज का प्रचार-प्रसार करते हैं और प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से प्रतिभागी छात्र-छात्राओं की साज सज्जा के नाम पर 500 से लेकर 1000 हजार रुपये वसूलते हैं।
यही नहीं परीक्षा फीस के नाम पर भी 500 से 1000 रुपये वसूले जाते हैं। वर्ष भर में तीन परीक्षाएं होती हैं तो तीन हजार रुपये वसूल लिए जाते हैं। इसी प्रकार कभी टूर के नाम पर तो कभी खेलकूद के नाम पर भी अभिभावकों से रुपये वसूले जाते हैं। जब कोई अभिभावक मना करता है तो पहले तो बच्चे को ही डांट दिया जाता है बाद में अभिभावक को भी स्कूल से बच्चा निकाल लेने तथा फेल करने की धमकी दे दी जाती है।