मथुरा/टाउनशिप। ‘बहनों में है हिम्मत भारी, तोड़ के बंधन थामी गाड़ी’, पंख लगा लिए हैं हमने, तो पिंजड़े में कौन बैठेगा...। बेटी की सुरक्षा के लिए महिलाओं का जोश, संदेश भरे गीत, नाटिकाओं ने लोगों को झकझोर दिया। योजनाओं की जागरुकता के लिए बाइकों पर सवार होकर महिलाओं की टीम पहुंची तो उनका जोरदार स्वागत किया गया।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग और महिला सामाख्या के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित विनायक पैलेस में गूंज कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बेटी का महत्व समझाया गया। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश के साथ ही महिला हेल्पलाइन 181 को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निकाली जा रही महिला बाइक रैली का जोरदार स्वागत किया गया।
बाइक रैली का नेतृत्व कर रही पल्लवी फौजदार ने बताया कि यह रैली 23 दिसंबर से शुरू हुई है जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में बेटी को बचाने, बेटी को पढ़ाने, सरकारी योजनाओं के प्रति आम लोगों को जागरूक करते हुए निकाली जा रही है। रैली में निर्मली, एनी, ममता, अनीता, तरुना, कृष्णा, चारु, सुजाता, मोनिका, सीमा थीं। यह रैली आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज होते हुए 30 दिसंबर को कानपुर पहुंचेगी।
महिला सामाख्या की ओर से वर्षा कुलश्रेष्ठ ने वृक्ष और बेटियों के संरक्षण की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के साथ ही महिला सशक्तीकरण के लिए चलाया जा रहा है। इस अवसर पर कृष्णा, सुशीला, लक्ष्मीपाल, गीतांजलि आदि मौजूद थे। समारोह में चिकित्सकों की टीम भी तैनात थी, जिसमें डा. अनुराग गुप्ता, डा. हरिनारायन प्रभाकर, डा. मेघश्याम गौतम टीम के साथ, प्रशासनिक अफसर भी मौजूद थे।
प्रभावी मंचन से भावुक हुए लोग
मथुरा। मंच पर नुक्कड़ नाटक ‘बेटियां’ का मंचन किया जा रहा था। गर्भ में बेटी को पिता मरवाने की बात कहता है मां बिलखती है। तभी कोख से आवाज आती है मां मुझे बचा लो। मैं इस दुनिया में आंखें खोलना चाहती हूं, जीना चाहती हूं। मां भी मजबूती से पति का विरोध करती है, बेटी को जन्म देती है। बेटी का महत्व परिवार की समझ मेें आ जाता है। मंचन इतना प्रभावी था कि उपस्थित लोग भावुक हो गए।