दीक्षांत समारोह में सेल्फी लेती छात्राएं।
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मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सोने और चांदी के मेडल पाकर प्रतिभाएं खिल उठीं। डिग्रियों को हाथों में लिए नई पीढ़ी ने देश की सेवा का संकल्प लिया। समारोह में स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के 12 टॉपरों को गोल्ड मेडल, 12 छात्रों को सिल्वर मेडल के साथ ही कुल 2815 छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं।
छठवें दीक्षांत समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि ब्रह्ममोस एयरोस्पेस के संस्थापक तथा इसरो के डिस्टींग्यूस्ड प्रोफेसर पद्मभूषण एएस पिल्लई, कुलाधिपति नारायणदास अग्रवाल एवं कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान ने मां सरस्वती एवं प्रेरणास्रोत श्रीगणेशी लाल जी के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत शैक्षिक शोभायात्रा के साथ हुई। समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. एएस पिल्लई को जीएलए विश्वविद्यालय द्वारा मानद उपाधि प्रदान की गई। कुलपति प्रो. डीएस चौहान ने विवि की प्रगति के बारे में बताया। मुख्य अतिथि एवं ब्रह्ममोस एयरोस्पेस के संस्थापक डीआरडीओ के मुख्य नियंत्रक प्रो. एएस पिल्लई ने कहा कि अपने जीवन में सुख: समृद्धि के साथ जीवन व्यतीत करें आप भारत के निर्माता हैं। आप अपने अंदर रचनात्मक गुणों के साथ ही कठिन परिश्रम और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने बताया कि महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन ने कहा है कि भारतीयों ने हमको सिखाया कि कैसे गिना जाता है जो कि अब तक कि सबसे बेशकीमती वैज्ञानिक खोज है। प्रतिकुलपति प्रो. एएम अग्रवाल, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह, प्रो. आनंद मोहन अग्रवाल, सोसाइटी सेक्रेटरी नीरज अग्रवाल, विवेक अग्रवाल, कमलकांत उपमन्यु आदि थे। संचालन अनीसा शर्मा ने किया। आभार निदेशक अनूप कुमार गुप्ता ने व्यक्त किया।
छात्रों को याद दिलाए स्वामी विवेकानंद के विचार
मथुरा। ब्रह्ममोस एयरोस्पेस के संस्थापक प्रो. पिल्लई ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा कि कि कर्म अच्छा होता है, लेकिन ये सोच (चिंतन) से आता है। उच्च विचारों और उच्च आदर्शों से मस्तिष्क को भर लो उन्हें प्रतिदिन और प्रतिरात्रि अपने सामने रखो। इसके बाद महान कार्य संपादित होंगे।