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भाजपा में केंद्रीय चुनाव समिति तय करेगी महापौर उम्मीदवार

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फिरोजाबाद। महापौर के लिए चुनावी बिसात बिछना शुरू हो गई है। पिछड़ा वर्ग महिला के लिए सीट आरक्षित होने के बाद टिकट के लिए दावेदार लखनऊ से लेकर दिल्ली तक कवायद करने लगे हैं। भाजपा में महापौर का उम्मीदवार पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति करेगी। सपा में क्षेत्र के सांसद अक्षय यादव की पसंद पर मुहर लगेगी तो बसपा में पार्टी की मुखिया मायावती ही उम्मीदवार तय करेंगी। कांग्रेस अभी चुनाव पर रणनीति तय नहीं कर पायी है। जातिगत संतुलन का खाका सभी दलों में खींचा जा रहा है।
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भाजपा में टिकट की लाइन में लगे दावेदार जानते हैं कि पार्टी की टिकट हासिल करने का मतलब पहली जंग जीतना है। पार्टी में पिछड़ी जाति में शामिल राठौर, बघेल और कुशवाह समाज के चेहरे टिकट पर टकटकी लगाए हुए हैं। यादव समाज के नेताओं का अपना अलग गणित है। पार्टी के साथ पुरानी निष्ठा को कारण बताते हुए टिकट पर दावेदारी की जा रही है। भाजपा में महापौर का उम्मीदवार केंद्रीय चुनाव समिति तय करेगी।

यानी महापौर का उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मोहर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की लगेगी। निकाय चुनाव को भाजपा 2019 के लोकसभा का सेमीफाइल मान कर चल रही है। इस लिए निकाय चुनाव को लेकर पार्टी अधिक गंभीर है। शहर की सीट के समीकरण कुछ इस तरह के हैं कि पार्टी के लिए जीत का रास्ता एकदम आसान नहीं है इस लिए जिताऊ चेहरे पर मंथन किया रहा है। आरएसएस की टीम भी इसमें जुट गई है। पार्टी का खुफिया सर्वे भी शुरू हो गया है।
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समाजवादी पार्टी में महापौर का उम्मीदवार सांसद अक्षय यादव की पसंद का होगा। 2019 के समीकरण को देखते हुए पार्टी उम्मीदवार तय करेगी। सपा की नजर दीगर जाति के उम्मीदवार के साथ मुस्लिम मतदाताओं पर है। मुस्लिम मतदाताओं की भाजपा के खिलाफ नाराजगी को सपा इस चुनाव में भुनाने की रणनीति बनाते हुए उम्मीदवार पर विचार कर रही है।

उधर बसपा की नजर भी मुस्लिम वोट बैंक पर है। लेकिन दोनों ही दलों को मुस्लिमों में फिलहाल ऐसा कोई दमदार चेहरा नजर नहीं आता जिस पर दांव लगाया जा सके। पिछड़ा वर्ग में मुस्लिमों में भी कई जातियां शामिल हैं। उधर ओबेसी की पार्टी एआईएमआईएम भी निकाय चुनाव के लिए बिसात
फिरोजाबाद। महापौर के लिए चुनावी बिसात बिछना शुरू हो गई है। पिछड़ा वर्ग महिला के लिए सीट आरक्षित होने के बाद टिकट के लिए दावेदार लखनऊ से लेकर दिल्ली तक कवायद करने लगे हैं।
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