मथुरा। धरती सूखने लगी है। खेत मुरझा गए हैं। बरसात के इंतजार में खेतों में खड़ी नर्सरी सूख चुकी है। धान की रोपाई का समय केवल पंद्रह जून से जुलाई भर होता है। अगर हफ्ते भर में बरसात नहीं होती तो धान की रोपाई करना संभव नहीं हो पाएगा। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर जल्द बरसात नहीं हुई तो जिले में धान का रकबा घट जाएगा।
मथुरा जिले में 70 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होती है। अब जिन किसानों के पास सिंचाई के अपने संसाधन हैं उन्होंने तो धान की रोपाई कर ली है वरना तो काश्तकार आसमान निहार रहे हैं। कब बरसात हो और कब वह रोपाई करने खेत पर पहुंचें। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी तक जिले में पच्चीस फीसदी ही रोपाई हो सकी है। जिला कृषि अधिकारी प्रमोद कुमार का कहना है कि अभी तक पच्चीस फीसदी धान की रोपाई हो गई है। बरसात न होने से किसान परेशान है।
70 बीघा खेत में धान की फसल करने की तैयारी कर रखी थी। लेकिन मौसम की बेरुखी के चलते अब उनकी हिम्मत जबाव दे रही है।
-किसान सहदेव, निवासी गांव अकबरपुर, चौमुंहा
बीस बीघा जमीन में धान की रोपाई इंजन में डीजल फूंककर की है। लेकिन जब तक बरसात नहीं हो जाती धान की फसल अच्छी नहीं होती।
प्रदीप कुमार, निवासी राया
धान की रोपाई तो रुक गई है। बीस बीघा खेत तैयार है। बरसात हो तो रोपाई की जाए। बारिश नहीं होती है तो बहुत नुकसान होगा।
राम सिंह, निवासी बलदेव
सेहत पर भी पड़ रहा है बुरा असर
मथुरा। बरसात न होने का सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है। मौसम में नमी बढ़ने के साथ ही मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। इस मौसम में एलर्जी, डिहाइड्रेेशन के रोगी भी बढ़ने लगते है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में तैनात डा. मेघश्याम गौतम ने बताया कि शरीर में पानी की कमी होने की समस्या भी इसी मौसम में बढ़ने लगी है। जुकाम, खांसी, संक्रामक रोगियों की संख्या भी बढ़ने लगी है।