शिकोहाबाद (फिरोजाबाद)।
नोट बंदी के दौरान बैंक ऑफ इंडिया में हुए 30 लाख रुपये गायब करने की जांच तेज हो गई है। बैंक के जोनल कार्यालय की ओर से बुधवार को थाने में तहरीर दी गई। पुलिस ने जांच आख्या शामिल न होने की बात कहकर तहरीर को लौटा दिया।
केंद्र सरकार ने नौ नवंबर को नोट बंदी की घोषणा की थी। इसी दौरान बैंक स्थानीय बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में 60 लाख रुपये की नई करेंसी आई। इसमें से 30 लाख रुपये गायब कर दिया गया। इसकी जानकारी होने पर बैंक प्रशासन ने चार कर्मचारियों को निलंबन कर दिया था। निलंबन की कार्रवाई और जांच में फंसने के भय से कैशियर अशोक कुमार ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी।
बुधवार को आगरा जोनल कार्यालय के कर्मचारी बैंक अधिवक्ता के साथ कोतवाली पहुंचे और कोतवाली प्रभारी को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी। तहरीर में किसी व्यक्ति को आरोपी न बनाए जाने तथा विभागीय जांच आख्या शामिल न होने के कारण कोतवाली प्रभारी ने अधिवक्ता से एफआईआर दर्ज न करने की बात कही।
इस पर बैंक अधिवक्ता ने कोर्ट द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है। इस संबंध में जब बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक शशि भूषण श्रीवास्तव ने पूरे मामले में कुछ भी बोलने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि यह उच्चाधिकारियों का मामला है। इस पूरे प्रकरण में जोनल कार्यालय के अधिकारी ही सक्षम हैं।