कासगंज। मथुरा-बरेली के बीच प्रस्तावित सिक्सेलन के निर्माण कार्य को फिलहाल रफ्तार मिलती नहीं दिख रही। कागजों में स्वीकृति देने के बाद सरकार ने अभी तक इसके लिए धनराशि उपलब्ध नहीं कराई है। बजट के अभाव में एनएचएआई सिर्फ कागजी कोरम पूरा कर रही है।
सिक्सलेन के लिए संशोधित डीपीआर तैयार कर ली है। एनएचएआई की टीम ने सर्वे करने के बाद अंतिम नक्शा तैयार किया। उसके बाद सरकार ने सिक्सलेन के लिए स्वीकृति दे दी। मथुरा से बरेली तक सिक्सलेन प्रस्तावित है। कुछ माह पूर्व पीएम नरेंद्र मोदी ने लखनऊ से पट्टिका अनावरण कर सिक्सलेन का शिलान्यास किया था। कागजों में सिक्सलेन की स्वीकृति करने के बाद सरकार ने अब तक धनराशि स्वीकृत नहीं की है। इस कारण हाल फिलहाल मथुरा-बरेली के बीच सिक्सलेन में काम नहीं होगा। एनएचएआई ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक धनराशि नहीं मिलेगी तब तक काम हो पाना संभव नहीं है।
महत्वपूर्ण है अतिमहत्वपूर्ण नहीं सिक्सलेन
कासगंज। सरकार जिन राष्ट्रीय राजमार्गों को स्वीकृति देती है उन्हें दो भागों में बांटती है। एक अतिमहत्वपूर्ण परियोजना और एक महत्वपूर्ण परियोजना। मथुरा-बरेली सिक्सलेन महत्वपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। इससे पहले अतिमहत्वपूर्ण श्रेणी के राष्ट्रीय राजमार्गों पर काम होना है।
आंकड़े की नजर से
430 बी के नाम से प्रस्तावित है मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग।
2 बार संशोधित की जा चुकी है डीपीआर।
3450 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा राष्ट्रीय राजमार्ग।
जिला प्रशासन को अभी तक कार्य शुरू करने की सूचना एनएचएआई ने नहीं दी है। न ही यह बताया गया है कि कितने किसान भूमि अधिग्रहण के लिए चिह्नित किए गए हैं। योगेंद्र कुमार, एडीएम।
- अभी तक सरकार ने मथुरा-बरेली सिक्सलेन के लिए धनराशि नहीं दी है। धनराशि मिलने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। शिवम त्रिपाठी, सर्वेयर, एनएचएआई।