मथुरा। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कराए गए सहस्त्रधारा स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ जी बीमार पड़ गए हैं। भगवान जगन्नाथ अब 15 दिनों तक आराम करेंगे भगवान का जड़ी बूटियों, औषधियों से उपचार कराया जाएगा। एक वैद्य हर रोज उनकी देखभाल करेंगे।
श्रीकृष्णजन्म स्थान सेवा संस्थान के विशेष कार्याधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ को सहस्त्र स्नान कराया जाता है। भगवान भक्तों द्वारा करवाए स्नान के बाद रात को बीमार हो जाते हैं। इस दौरान 15 दिनों के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इन दिनों उनकी सेवा की जाती है ताकि वह शीघ्र ठीक हो जाएं।
भगवान जगन्नाथ जी को आयुर्वेदिक काढ़े (दसमूलारिष्ठ) का भोग लगाया जाता है। 15 दिनों तक मंदिर में घंटे नहीं बजते और न ही अन्न का भोग लगता है। भगवान को केवल आयुर्वेदिक काढ़ा और फलों का रस दिया जाता है।
परंपरानुसार भगवान की बीमारी की जांच के लिए प्रतिदिन वैद्य (पुजारी) भगवान जगन्नाथ की देखभाल करते हैं। दिन में दो बार आरती होती है लेकिन इससे पहले भगवान को काढ़े का भोग लगाया जाता है। भगवान को प्रतिदिन शीतल लेप भी लगाया जाता है। भगवान जगन्नाथ को रात में सोने से पूर्व मीठा दूध भी निवेदित किया जाता है। भगवान के ठीक होने पर उस दिन जगन्नाथ यात्रा निकलती है।
श्री कृष्ष्ण जन्मभूमि से भगवान जगन्नाथ की स्नानयात्रा निकाली
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सोमवार को भगवान जगन्नाथ की परंपरागत स्नान यात्रा निकाली गई। जन्मस्थान के भागवत भवन स्थित भगवान जगन्नाथ जी के मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को शाम 5 बजे स्नान यात्रा का शुभारंभ वैदिक रीति रिवाज के तहत पूजा अर्चना से हुआ। फलभोग के बाद ठाकुर जी के श्रीविग्रह को परिक्रमा कराने बाद पंचामृत से दिव्य अभिषेक कराया गया। पूजा अर्चना के अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, संयुक्त मुख्य अधिशाषी राजीव श्रीवास्तव, विशेष कार्याधिकारी विजय बहाुदर सिंह, गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।