कासगंज। जेल से फिरौती के लिए किए गए पत्राचार में सजायाफ्ता कैदियों ने अहम भूमिका निभाई। सेंट्रल जेल में कार्यालय के काम के लिए लगाए गए तीन सजायाफ्ता कैदियों ने फिरौती के लिए जेल की सुरक्षा से खिलवाड़ किया। मामले ने तूल पकड़ा तो डीआईजी ने प्रकरण की जांच शुरू करते हुए तीन सजायाफ्ता कैदियों को कार्यालय से हटाकर विशेष निगरानी बैरक में रखा है। साथ ही बाहुबली कैदी की भी निगरानी बढ़ा दी है।
सोरों के गांव भिदौनी के बालक अपहरण फिरौती के मामले में कैदियों ने जेल की सुरक्षा से खिलवाड़ किया था। बंदी रक्षकों के अभाव में सजायाफ्ता कैदियों को जेल प्रशासन ने जेलर कार्यालय पर काम के लिए संबद्ध कर लिया था। तीन कैदी जेल कार्यालय के काम पर लगाए गए थे जो पत्राचार करते थे। डाक की जिम्मेदारी भी जेल कार्यालय से संबद्ध सजायाफ्ता कैदियों की थी। बाहुबली कैदी धांसू बघेल ने कार्यालय से संबद्ध तीनों सजायाफ्ता कैदियों से सांठगांठ कर ली। उसके बाद धांसू ने अपहृत बालक की फिरौती के लिए जेल से पत्र बालक के परिजनों तक पहुंचाया। मामले ने जब तूल पकड़ा तो डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने जांच शुरू की। डीआईजी ने जांच में पाया कि सजायाफ्ता कैदियों ने जेल की गोपनीयता और सुरक्षा से खिलवाड़ किया। डीआईजी ने तीनों कैदियों को कार्यालय से हटाकर कड़ी निगरानी के बैरक में रखा है।
- धांसू सिंह कैदी फिरोजाबाद जेल से आगरा सेंट्रल जेल में भेजा गया है। उसे कड़ी निगरानी बैरक में रखा गया है। धांसू सिंह ने जेल से फिरौती के लिए पत्र भेजा था। तीन सजायाफ्ता कैदियों की मिली भगत से पत्राचार हुआ था। तीनों जेल कार्यालय से हटाकर कड़ी निगरानी में रखा है- संजीव त्रिपाठी, डीआईजी जेल।
- बंदी रक्षकों के अभाव में कैदियों को कार्यालय के काम पर लगा लेते हैं। तीन कैदियों ने बिना स्कू्रटनी के फिरौती का पत्र जेल से बाहर भेज दिया। यह लापरवाही थी। उपमहानिरीक्षक जेल के निर्देश पर तीनों की मशक्कत बढ़ा दी है- एसपी मिश्रा, जेलर, सेंट्रल जेल, आगरा।