वृंदावन (मथुरा)। सुखधाम भवन में कवि सम्मेलन समिति के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन विख्यात कवि अशोक चक्रधर ने कहा कि कवि सम्मेलनों के मंच पर अब भी पुरानी कविताएं अधिक सुनाई देतीं हैं। उन्होंने कहा कि नई कविताओं में हूटिंग और छूटने का डर रहता है। जबकि पुरानी कविता पूर्व परीक्षित होती हैं। जिसमें कवि को यह पता रहता है कि इसकी प्रस्तुति करने पर तालियां अवश्य बजेंगी।
कवि अशोक चक्रधर ने आयोजक कवि सम्मेलन समिति की रूपरेखा पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि समिति देश के कवियों को संगठित कर उनको सम्मान दे रही है। बताया कि वह पिछले चार दशक से आत्मलोचन के दौर से गुजर रहे हैं। समिति ने ऐसे कवियों की मदद की जो बीमार थे। उन्होंने जोर दिया कि कवियों के लिए ऐसे प्रस्ताव पास किए जाने चाहिए, जो उनकी बौद्धिक संपदा के संरक्षण के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और मदद के लिए जरूरी हों। इस मौके पर उन्होंने अपने हास्य अंदाज में स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम को भी जरूरी बताया।
उधर, कार्यक्रम में देर रात देर रात नव कवियों ने काव्यपाठ कर समा बांधा। अंतिम सत्र में कवि नम्रता जैन, कंचन नामदेव, विशाल समर्पित, दिव्या नेह दुबे, ज्ञान प्रकाश आकुल, गौरव दुबे, राहुल सिंह शेष, श्वेता सिंह, नंदिनी श्रीवास्तव, भूमिका जैन, नूतन ज्योति, ज्योत्स्ना शर्मा अमित शर्मा, कमल आग्नेय, चेतन चर्चित आदि ने काव्यपाठ किया।
कवियों के स्वास्थ्य और प्रादेशिक समितियों के गठन पर दिया जोर
वृंदावन (मथुरा)। अधिवेशन में कवि अशोक स्वतंत्र ने शरीर और मन के पारस्परिक संबंध को बताया। समिति के सह सचिव चिराग जैन ने बताया कि आयोजन में कवि सम्मेलन के शुल्क, बौद्धिक संपदा के संरक्षण, प्रादेशिक समितियों के गठन और सदस्यों की अर्हता के साथ सदस्यता का शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव पारित किए गए हैं। इस अवसर पर कवि सुरेंद्र शर्मा, कुंवर बेचैन, मधुप पांडेय, सुभाष काबरा, मुकुल महान व गजेंद्र प्रियांशु, शशांक प्रभाकर, मनीषा शुक्ला, प्रज्ञा विकास, नन्दिनी श्रीवास्तव, अशोक चारण राहुल दुबे, शालिनी सरगम, मनोज गुर्जर, पार्थ नवीन, गौरव शर्मा और अनुज त्यागी, पूनम वर्मा आदि उपस्थित थे।