कासगंज। एसबीआई गोरहा के ग्राहक सेवा केंद्र की जांच में और भी केंद्रों के घोटालें खुलने लगे हैं। सिर्फ गोरहा ही नहीं बल्कि अन्य दो ग्राहक सेवा केंद्र भी जालसाजी कर लाखों रुपयों का गबन कर चुके हैं। पिछले वर्ष शिकायत मिलने पर एसबीआई ने तीनों ग्राहक सेवा केंद्र से अनुबंध समाप्त करने को पत्र लिखा था, लेकिन ओरियल कंपनी ने फिर भी केंद्रों के संचालन पर रोक नहीं लगाई।
पिछले वर्ष जनवरी माह में भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण शाखा को शिकायत मिली कि ग्राहक सेवा केंद्र गोरहा के संचालक अर्जुन ने बड़ी जालसाजी की है। इसके अलावा शिकायत थी कि गोरहा में ही एक ओर ग्राहक सेवा केंद्र हैं, जिसका संचालक कुलदीप है। उसने भी जालसाजी की है। शहर के सहावर गेट निवासी प्रगति जैन ने भी ग्राहक सेवा केंद्र पर जालसाजी कर केंद्र बंद कर दिया और फरार हैं। जांच में इस तरह दो ओर ग्राहक सेवा केंद्रों की जालसाजी सामने आई है। भारतीय स्टेट बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि जालसाजी की शिकायत मिलने पर तीनों ही ग्राहक सेवा केंद्र से अनुबंध समाप्त किया जा चुका है। जनवरी 2018 में ही तीनों से अनुबंध समाप्त कर ओरियल कंपनी को पत्र भेज दिया था। बैंक का दावा है कि अनुबंध समाप्त करने के बाद सेवा केंद्रों पर प्रतिबंध लगाने को भी पत्र भेजा था। लेकिन ओरियल कंपनी की सह पर केंद्र संचालक लेनदेन करते रहे। दो ओर सेवा केंद्रों के प्रकरण सामने आने पर जांच में खलबली मची हुई है।
आंकड़े की नजर से
- 5000 से अधिक उपभोक्ताओं के साथ केंद्र संचालकों ने की जालसाजी
- 2018 के जनवरी माह में बैंक ने अनुबंध खत्म किए जाने का किया दावा
- एक केंद्र की जांच एवं दो पर अभी तक कार्रवाई नहीं
पल्ला झाड़ रही ओरियल कंपनी
कासगंज। जांच में सहयोग से ही नहीं बल्कि ग्राहक सेवा केंद्रों से भी ओरियल कंपनी पल्ला झाड़ रही है। कंपनी के डायरेक्टर डीके धींगरा ने विस्तृत जानकारी नहीं दी, बल्कि असिस्टेंट मैनेजर विक्रम कुमार के पाले में गेंद डाल दी। गुरुग्राम स्थिति कार्यालय पर असिस्टेंट मैनेजर ने ग्राहक सेवा केंद्र के घोटाला नाम आते ही उन्होंने मोबाइल बंद कर लिया।
जांच टीम में शामिल नहीं हूं, जो भी जानकारी स्टेट बैंक ग्रामीण शाखा से मांगी जा रही हैं, उसे दे रहे हैं। इतना पता है कि वर्ष 2018 में तीन ग्राहक सेवा केंद्रों से अनुबंध समाप्त कर दिया गया है। आरके सिंह, प्रबंधक, एसबीआई ग्रामीण शाखा।