कासगंज। जालसाज ने सरकारी भूमि के बैनामे ही नहीं किए बल्कि यह बैनामे बैंक में बंधक भी बना दिए। संपत्तियों पर किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर ऋण ले लिया अब सरकारी संपत्तियों पर प्रशासन का कब्जा हो रहा है। निश्चित ही बैंक की मुसीबत बढ़ेगी। ऋण वसूली के लिए बैंक को मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि धरोहर बंधक बनाई गई जमीन से जालसाज का हक छिन गया है।
भूमि घोटाले के मास्टर माइंड ठठेरपुर निवासी दीनदयाल पुत्र छोटेलाल ने सरकारी संपत्तियों पर बड़ी जालसाजी की। कई सरकारी संपत्तियों पर चक बंदी कार्यालय से फर्जीवाड़ा कराकर अपना कब्जा कर लिया। तहसील कर्मियों की मिली भगत से कृषि योग्य भूमि के बैनामे आवासीय भूमि में कर दिए। जबकि बैनामे में मालियत स्टांप कृषि भूमि के लगाए। जांच में एक के बाद एक घोटाले की परत खुल रही है। अब एक और बड़ा मामला खुलकर सामने आया है। जालसाज ने सरकारी संपत्तियों पर कब्जे कर सरकार को ही चूना नहीं लगाया बल्कि बैंक के साथ भी धोखाधड़ी की। दीनदयाल ने सरकारी संपत्तियों को ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त सोरों में बंधक बना दिया। ठठेरपुर की सरकारी संपत्तियों में पहले तो अपना नाम दर्ज कराया। उसके बाद उन संपत्तियों पर किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए ऋण ले लिया। जालसाज ने 8 लाख 70 हजार रुपये का ऋण बैंक से लिया। अब विवादित संपत्ति पर प्रशासनिक कब्जे हो रहे हैं। ऐसे में बैंक को कर्जा वसूलने के लिए मशक्कत करनी होगी।
आंकड़े की नजर से-
- 2016 मेें बंधक बनाईं संपत्तियां।
- 3 से अधिक सरकारी संपत्तियों पर लिया है जालसाज ने कर्ज।
- 8.70 लाख रुपये का लिया है बैंक से कर्ज।
- बैंक के सिस्टम पर देखने से पता चला है कि एक संपत्ति को दीनदयाल ने 4 लाख 30 हजार रुपये में बंधक बनाया है। अभी तक उसका ऋण नहीं चुकाया है। अन्य संपत्तियों को भी बंधक बनाकर उसने कर्ज लिया है- प्रवीन यादव, प्रबंधक, ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त सोरों।
- सभी संपत्तियों की जांच चल रही है। पता किया जा रहा है कि किन किन सरकारी संपत्तियों पर जालसाज ने ऋण किया था। ऋण चुकता करने की जिम्मेदारी ऋण धारक की है- ललित कुमार, एसडीएम।