एटा। न तो संसाधन हैं और न ही कोई जागरूक। जिले में चल रहे कोचिंग सेंटरों में आग से निपटने के इंतजाम नदारद हैं। अग्रिशमन विभाग भी इन कोचिंग सेंटरों पर इंतजाम दुरुस्त करने को लेकर बेपरवाह है। आलम यह है कि जिले में संकरी गलियों में कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। जहां रोज सैकड़ों बच्चे पढ़ने पहुंचते हैं, लेकिन संसाधनों का अभाव और अनदेखी भारी पड़ सकती है।
शुक्रवार को सूरत में कोचिंग सेंटर में आग लगने से 19 विद्यार्थी काल के गाल में समा गए। कोचिंग सेंटर पर आग बुझाने के इंतजाम नहीं थे। जिले में भी कुछ वर्षों से कोचिंग सेंटरों की बाढ़ आ गई है। करीब 100 से भी अधिक कोचिंग सेंटर जिले में पंजीकृत हैं। जबकि अनाधिकृत रूप से सैकड़ों कोचिंग सेंटर चल रही हैं। पंजीकृत व गैर पंजीकृत कोचिंग सेंटरों पर नजर डाले तो अधिकतर में अग्रिशमन यंत्र नहीं हैं। वहीं कोचिंग सेंटर इतनी संकरी गलियों में हैं कि आगजनी के वक्त अग्रिशमन वाहन भी आसानी से नहीं पहुंच सकता। अग्रिशमन विभाग का भी जिले में हाल कुछ ज्यादा बेहतर नहीं है। विभाग के पास महज दो दमकल वाहन हैं। वहीं अग्रिरोधी यंत्रों और स्टाफ का भी टोटा है। ऐसे में जरूरत है कि विभाग अपने संसाधनों को दुरुस्त करे। साथ ही कोचिंग सेंटरों में अग्रिशमन को लेकर व्यापक अभियान चलाए और लोगों को जागरूक करें।
सेंटर संचालक भी नहीं करते पहल
जिले में संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों में रोज सैकड़ों विद्यार्थी पढने आते हैं। शहर के प्रमुख शांतिनगर में हर गली में सेंटरों के बाहर साइकिलों का जमावाड़ा लगता है। सेंटर संचालक भी आगजनी की घटनाओं को लेकर सुरक्षा उपायों पर पहल करते नजर नहीं आते।
रोज हो रहीं चार घटनाएं
जिले में जनवरी से अब तक 50 से अधिक अग्निकांड हो चुके हैं। बीते साल 2018 में 270 अग्रिकांड हुए, लेकिन विभाग खुद को दुरुस्त नहीं कर सका।
जिले में अग्रिकांडों से निपटने के लिए प्रयास किए जाते हैं। लोगों को जागरूक किया जाता है। कोचिंग सेंटरों को लेकर भी अभियान चलाया जाएगा। - एसके दोहरे, अग्रिशमन अधिकारी