मैनपुरी। सरकार राजकीय माध्यमिक इंटर कॉलेजों की शिक्षा के विकास के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था के लिए अध्यापकों की तैनाती नहीं की जा रही है। इसके कारण छात्र-छात्राओं का भविष्य संकट में है। जिले में संचालित कुल 22 कॉलेजों में 197 शिक्षकों की कमी चल रही है।
जिले के राजकीय कॉलेजों की शिक्षा व्यवस्था रामभरोसे हैं। नि:शुल्क शिक्षा व्यवस्था के चलते यहां छात्र-छात्राओं की तो कमी नहीं है, लेकिन यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों की बड़ी संख्या में कमी चल रही है। एक तरफ जहां सरकार और विभाग बेहतर शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये प्रतिवर्ष खर्च कर रहा है।
वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों की बड़ी संख्या में कमी होने के कारण शिक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। जिले के राजकीय कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कई जगह तो शिक्षक- शिक्षिकाओं को संबद्ध करके काम चलाया जा रहा है। यही कारण है कि परीक्षा परिणाम की टॉप छात्र-छात्राओं की सूची में राजकीय कॉलेजों के बच्चे शामिल नहीं हो पाते हैं।
आठ राजकीय हाईस्कूल में मात्र एक शिक्षक
जिले के राजकीय हाईस्कूलों पर नजर डाली जाए तो 12 राजकीय हाईस्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से आठ में मात्र प्रधानाचार्य के साथ एक शिक्षक की तैनाती है। प्रधानाचार्य अधिकतर सूचनाओं के आदान-प्रदान में व्यस्त रहते हैं। शेष बचा एक शिक्षक ही छह विषयों को पढ़ाने के लिए मजबूर है। ऐसे में कैसे शिक्षा का स्तर सुधर सकता है।
लिपिक भी तैनात नहीं है
राजकीय हाईस्कूल की बात करें तो यहां प्रवेश प्रक्रिया से लेकर बोर्ड के अन्य काम की देख रेख के लिए एक भी स्कूल में लिपिक की तैनाती नहीं है। इससे प्रधानाचार्य व शिक्षक को लिपिक का कार्य भी करना पड़ रहा है।