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बिना कोच के बास्केट में कैसे डाली जाए बॉल

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फोटो- 9 से 13
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बिना कोच के बास्केट में कैसे डाली जाए बॉल
कब पूरी होगी बास्केटबॉल के खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षक की तलाश
अमर उजाला ब्यूरो
मैनपुरी। खेल के नाम पर सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जा रहा है, लेकिन हकीकत में धरातल पर इसका 30 प्रतिशत भी असर नहीं दिख रहा है। जिले में बास्केटबॉल के खिलाड़ी प्रशिक्षण पाना चाहते हैं लेकिन प्रशिक्षक न मिलने के कारण उनकी प्रतिभा का दमन हो रहा है।
बास्केटबॉल खेल की बात करें तो जिले में कुछ कॉलेजों में बास्केटबॉल के लिए कोर्ट है, लेकिन बास्केटबॉल का कोच न होने के कारण इस खेल की शौकीन प्रतिभाओं का दमन हो रहा है। कॉलेजों की तो बात छोड़ो नगर के एक मात्र पंडित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में भी बास्केटबॉल के लिए कोच नहीं है। जबकि यहां हजारों रुपये खर्च कर बास्केटबॉल के लिए कोर्ट बनाया गया है। इस कोर्ट पर पिछले कई वर्षों से एक भी खेल नहीं खेला गया है। सरकार द्वारा विभिन्न अवसरों पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिताओं में भी इस खेल को लेकर जिले में कोई प्रतिभा नहीं निखर सकी है। यदि किसी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाए तो उसमें बिना प्रशिक्षण के ही खानापूर्ति करा ली जाती है। यदि बास्केटबॉल का जिले में प्रशिक्षक मिले तो निश्चित ही इस खेल में जिले से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी मिल सकते हैं।
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बास्केटबॉल की प्रतिभाओं के लिए सरकार और विभाग कोच नहीं दिला सका। बास्केटबाल के शौकीन युवक तथा युवतियां प्रशिक्षण पाना चाहते हैं लेकिन बिना कोच के उनकी यह उम्मीद कैसे पूरी हो सकती है।
हरमीत
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बास्केटबॉल एक ऐसा खेल है जिसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक जाने के बहुत अवसर होते हैं। जिले के खिलाड़ियों को भी यदि बेहतर प्रशिक्षण दिलाया जाए तो वे भी इस खेल में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन करें।
अनुज गुप्ता
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जिले में खेल के क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है जरूरत है तो उन्हें बेहतर प्रशिक्षण दिलाए जाने की। जिले में अन्य खेलों की तरह ही बास्केटबॉल का भी कोई कोच नहीं है जो बास्केटबॉल के शौकीन खिलाड़ियों के लिए बड़ी दिक्कत है।
अक्षय चौधरी

इतिहास गवाह है कि बिना गुरु के कोई भी आगे नहीं बढ़ सका है। जिले में खेल गुरुओं की बड़ी कमी है। खेल गुरु न होने के कारण जिले के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को पहचान नहीं पा रहे हैं। वहीं प्रतिभाओं का दमन भी हो रहा है।
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अमर सिंह

प्रशिक्षक के लिए प्रस्ताव तैयार करा फाइल उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद इस पर विभाग की सहमति होने की संभावना है।
केपी सिंह जिला, क्रीड़ाधिकारी
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