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बंदियों की समस्याएं जानेंगी विधिक टीमें

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बंदियों की समस्याएं जानेंगी विधिक टीमें
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पीड़ित परिवारों को दिलाएंगी मूलभूत सुविधाएं
अमर उजाला ब्यूरो
मैनपुरी। जेल में निरुद्ध बंदियों के परिवारों को विधिक टीमें मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराएंगी। इसके लिए बंदियों से जेल में मिलने के बाद उनके परिवारों से संपर्क करके समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। जल्द ही इस दिशा में कवायद शुरू कर दी जाएगी।
परिवार के मुखिया या अहम सदस्य के जेल जाने के बाद उनके परिवारों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मूलभूत सुविधाएं पाने के लिए परिवार के सदस्य सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं। प्रभावी तरीके से पैरवी नहीं हो पाने पर पीड़ित परिवार मूलभूत सुविधाएं पाने से वंचित रह जाते हैं। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीमें जेल में निरुद्ध बंदियों तथा उनके परिजनों से मिलकर समस्याओं की जानकारी जुटाएंगी। समस्याओं का बिंदुवार ब्योरा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराया जाएगा। उसके बाद पीड़ित परिवारों को मूलभूत सुविधाएं दिलाने की दिशा में पहल शुरू कराई जाएगी।
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दो टीमें बनाई गई
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने दो टीमें बनाई हैं। पहली टीम में जेल विजीटर संदीप त्रिपाठी, पैरालीगल वालंटियर जितेंद्र सिंह, गिरीशा कुमारी यादव, सुरभि शर्मा, डॉक्टर राममोहन, राजीव कुमार को शामिल किया गया है। दूसरी टीम में जेल विजीटर रस्किन खान, पैरालीगल वालंटियर रामरतन, सुमन कुमारी गुप्ता, सुशील कुमार, ममता शाक्य, शिवम कटियार को शामिल किया गया है।
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यह ब्योरा जुटाया जाएगा
विधिक सेवा प्राधिकरण की टीमें तय किए गए बिंदुओं पर जानकारी जुटाएंगी। तय किए गए बिंदुओं में पीड़ित परिवार की राशन कार्ड, आधार कार्ड, पैनकार्ड, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आवास, शौचालय की समस्याओं का विस्तृत ब्योरा मौके पर पहुंचकर जुटाएंगी।
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30 जून तक देनी होगी रिपोर्ट
विधिक सेवा प्राधिकरण की टीमें 31 मई तक जेल में बंदियों से मिलकर जरूरी जानकारी हासिल करेंगी। इसके बाद बंदियों के परिजनों से मिलकर दोनों टीमें अपनी तथ्यात्मक और बिंदुवार रिपोर्ट 30 जून तक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में जमा करेंगी।
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बंदियों पर एक नजर-
विचाराधीन बंदी पुरुष 813
विचाराधीन बंदी महिला 38
सिद्धदोष बंदी पुरुष 139
सिद्धदोष बंदी महिला 11
मृत्युदंड सजा के बंदी पुरुष 03
जेल अस्पताल में भर्ती बंदी 18
महिला बंदियों के आश्रित बच्चे आठ

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर दो टीमों का गठन किया गया है। टीमों को अपनी रिपोर्ट 30 जून तक कार्यालय में जमा करानी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर बंदियों के परिजनों की समस्याओं का निराकरण कराया जाएगा।
तेंद्रपाल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
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