मैनपुरी। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को इसलिए भेजा जाता है जिससे उनकी नींव मजबूत हो सके। यहां तो उनकी नींव को खोखला किया जा रहा है। पहले शिक्षकों ने बच्चों को पढ़ाया नहीं, अब अच्छा रिजल्ट बनाने के चक्कर में उन्हें नकल की अनुमति दे दी।
परिषदीय स्कूलों की वार्षिक परीक्षाओं में शिक्षक खुलेआम नकल करा रहे हैं। शिक्षक खुद ही बच्चों को किताबों से लिखने के लिए कह देते हैं। इतना ही नहीं बच्चे झुंड बनाकर नकल करते हैं और शिक्षक गपशप में लगे रहते हैं। इस खेल को अमर उजाला ने उजागर भी किया था, लेकिन इसके बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग ने इसकी सुध नहीं ली।
:किशनी क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय केशोपुर में बच्चे परीक्षा दे रहे थे। कमरे का नजारा ऐसा था कि दूर-दूर तक कहीं परीक्षा जैसा माहौल नहीं था। बच्चे झुंड बनाकर किताब से नकल कर रहे थे। वहीं, अध्यापक बाहर खड़े हुए थे। उनका कहना था कि ये बच्चे इतने होशियार नहीं हैं कि किताब से भी सवालों के जवाब ढूंढ पाएं। मतलब साफ है कि उन्हें पढ़ाया ही नहीं गया।
शहर से सटे प्राथमिक विद्यालय नगरिया देहात में एक शिक्षिका गेट पर ही खड़ी थीं। जैसे ही उन्होंने कैमरे को देखा तो अंदर जाने से मना कर दिया। उनका कहना था कि फोटो के लिए बीआरसी से मना किया गया है। वे व्हाट्सएप पर आदेश आने का दावा कर रही थीं। जब खंड शिक्षाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने ऐसे किसी आदेश से इनकार किया। इतने देर में अन्य शिक्षकों ने सभी बच्चों को सही से बैठा दिया, लेकिन फिर भी कुछ बच्चे किताब रखकर नकल कर रहे थे।
परिषदीय विद्यालयों में परीक्षाओं में नकल कराना गलत है। जहां भी ऐसा किया जा रहा है उन शिक्षकों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रमोद कुमार उपाध्याय, जिलाधिकारी, मैनपुरी।