मैनपुरी। सीजेएम कोर्ट में एक मामले में झूठे साक्ष्य देने पर प्रदेश के प्रमुख सचिव, पूर्व संयुक्त निदेशक पैरा मेडिकल लखनऊ, तत्कालीन एसपी और इंस्पेक्टर कोतवाली के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज किया गया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च तय की गई है।
थाना कोतवाली क्षेत्र के कचहरी रोड नवाटेढ़ा हाउस निवासी राज्य कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ वर्ष 2011 और 2012 में थाना कोतवाली में चार मुकदमे दर्ज किए गए थे। धोखाधड़ी, फर्जी कागज तैयार करने, फर्जी कागजों का असली के रूप में प्रयोग करने के आरोप में दर्ज की गई सभी रिपोर्ट में पुलिस ने जांच के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेएम कोर्ट में योगेंद्र सिंह चौहान के अधिवक्ता अरविंद कुमार पांडेय ने तर्क दिया कि मुकदमे की जांच के दौरान अदालत में तत्कालीन प्रमुख सचिव स्वास्थ्य हिमांशु कुमार, तत्कालीन सीएमओ डॉ. विनोद कुमार, तत्कालीन एसपी हैप्पी गुप्तन और तत्कालीन इंस्पेक्टर कोतवाली आरके शर्मा ने अदालत में गुमराह करने के लिए झूठे साक्ष्य दिए हैं। सीजऐम शक्ति सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
अब यहां हैं आरोपी अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन सचिव स्वास्थ्य हिमांशु कुमार फिलहाल प्रमुख सचिव स्टांप एवं निबंधन हैं। तत्कालीन एसपी हैप्पी गुप्तन वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्रालय में तैनात हैं। तत्कालीन सीएमओ डॉ. विनोद कुमार सेवानिवृत्त होने के बाद जयपुर हाउस आगरा में और तत्कालीन इंस्पेक्टर आरके शर्मा भी सेवानिवृत्ति के बाद कृष्णानगर, मेरठ में रह रहे हैं।
यह था मामला
फर्जी अभिलेखों केे आधार पर नौकरी करने, पांच एमओआईसी को धमकाने के आरोप में योगेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ प्रमुख सचिव स्वास्थ्य हिमांशु कुमार के आदेश पर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। फर्जी नियुक्ति के संबंध में सीबीसीआईडी ने थाना बजीरगंज लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में उसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने भी वर्ष 2002 में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें एफआर लगा दी गई।
नौकरी से हो चुके बर्खास्त
योगेंद्र सिंह चौहान को शासन स्तर पर की गई कार्रवाई के बाद 30 जून 2011 को बर्खास्त किया जा चुका है। उनका आरोप है कि प्रमुख सचिव हिमंाशु कुमार ने साजिश रचकर अधिकारियों की मिलीभगत से उसे नौकरी से बर्खास्त कराया है। जांच के नाम पर झूठे तथ्यों के आधार पर ही चार्जशीट कोर्ट में भेजी गई है।