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किसान सम्मान निधि देख चहक उठे किसानों के चेहरे

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kishan samman nidhi - फोटो : amar ujala
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फिरोजाबाद। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पात्रता श्रेणी में आने वाले किसानों की डाटा फीडिंग पर जिला प्रशासन का जोर है। सोमवार तक जिले में एक लाख 68 हजार 384 किसानों के डाटा लॉक किए गए।
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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत जिले में कुल एक लाख 81408 किसानों को पात्रता श्रेणी में रखा गया है। पात्रता श्रेणी में शामिल किसानों की डाटा फीडिंग जल्द पूरी कराने पर जिला प्रशासन को जोर है। सोमवार तक एक लाख 68384 किसानों के डाटा लॉक किया।

फीडिंग कार्य में कृषि विभाग के अतिरिक्त कई अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी डाटा फीडिंग में जुटे हैं। जिन किसानों के डाटा लॉक किए उनमें से अरांव ब्लाक के 16421, एका 19274, फिरोजाबाद 24063, जसराना 13653, हाथवंत 15228, नारखी 17963, मदनपुर 21048, शिकोहाबाद 20992, टूंडला ब्लाक के 19742 किसान हैं।

किसान सम्मान निधि के तहत पात्रता श्रेणी में आए किसानों के खातों में प्रथम किस्त की धनराशि शासन स्तर से भेजी जा रही है। अभी तक 90 हजार किसानों के खातों में किसान सम्मान निधि की प्रथम किस्त जारी की जा चुकी है।

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डॉ हंसराज, उपनिदेशक कृषि



किसान सम्मान निधि के लिए लगी रही बैंकों में लाइनें
सोमवार को बैंक में मोदी सरकार की भेजी गई किसान सम्मान निधि को देखने के लिए किसानों की लाइनें लगी रहीं। बैंकों पर जिस किसी किसान के खाते में रुपये आ गए थे उनके चेहरों पर खुशी दिख रही थी। वहीं जिस किसान के खाते में उक्त धनराशि की पहली किस्त नहीं आई थी, उनके चेहरों पर मायूसी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के खातों में किसान सम्मान निधि के तहत दो-दो हजार रुपये डाला जाना सराहनीय कार्य है। इसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।
किसान, नरेंद्र सिंह

किसान सम्मान निधि के तहत मिल रहे दो हजार रुपये के साथ ही साल भर में छह हजार रुपये मिलेंगे जो हम जैसे छोटे किसानों के बहुत काम आएंगे। फसल के लिए बीज, खाद की व्यवस्था हो सकेगी।
किसान, मिथलेश देवी

किसान सम्मान निधि ऊंट के मुंह में जीरे की तरहत है। हिसाब लगाया जाए तो सरकार किसानों को मात्र 17 रुपये रोज दे रही है। इससे ज्यादा किसान चाय-पानी में खर्च कर देते हैं।
किसान, रविकांत

सरकार चुनाव से पहले जो भी दे रही है, वह सब चुनावी स्टंट है। चुनाव से पहले ही यह राशि मिल पाएगी इसके बाद सरकार बदल गई तो इससे भी हाथ धोना पड़ेगा।

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किसान, महेश पाठक

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