मैनपुरी। होर्डिंग और बैनरों से शहर पटा पड़ा है, लेकिन पालिका का खजाना खली है। पूरे शहर को महज कुछ हजार में होर्डिंग बैनर लगाने के लिए ठेके पर दे दिया गया। ठेकेदार धड़ल्ले से वसूली कर अपनी जेबें भर रहे हैं, लेकिन पालिका को कुछ नहीं मिल रहा है।
सभी नगर निकायों में होर्डिंग व बैनर के लिए हर साल ठेका उठाया जाता है। इसके लिए टेंडर होते हैं। जो भी सबसे अधिक धनराशि का टेंडर डालता है, उसे ही ठेका दे दिया जाता है। इसके बाद शहर में लगने वाले होर्डिंग-बैनर पर प्रति वर्गमीटर के अनुसार ठेकेदार द्वारा धनराशि वसूल की जाती है। नगर पालिका को इससे एक बड़ी धनराशि मिलती है, लेकिन यहां तो नगर पालिका को महज 55 हजार रुपये ही मिल सके।
हालांकि पालिका का कहना है कि ठेका लेने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। मजबूरन पालिका को कम रुपयों में ही ठेका उठाना पड़ा। अब अगर ठेकेदार की कमाई की बात करें तो ठेकेदार औसतन पांच सौ रुपये प्रति माह होर्डिंग का किराया वसूल रहा है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो शहर में दस हजार से अधिक होर्डिंग और बैनर लगे हुए हैं। शहर का शायद ही कोई पोल ऐसा होगा जहां बैनर आदि न लगे हों। ठेकेदार होर्डिंग लगाने वालों से किराए के रूप में पांच सौ रुपये प्रतिमाह वसूल रहा है। वहीं बैनर आदि के बदले में भी मोटी रकम ली जा रही है। शहर में होर्डिंग का कारोबार लाखों रुपये का है।
नगर पालिका के अलावा जिले में नौ नगर पंचायतें भी हैं, लेकिन इनमें से किसी भी नगर पंचायत में होर्डिंग बैनर लगाने के लिए ठेका नहीं उठाया जाता है। इससे नगर पंचायतों को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।