मैनपुरी। दुकानों की छतों पर लगे भारी-भरकम होर्डिंग और बैनर दूर से भले ही अच्छे लगते हैं, लेकिन ये खतरनाक साबित हो सकते हैं। शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ये लगे हुए हैं। प्रशासन का भी इन पर कोई ध्यान नहीं है। जबकि ये पूरी तरह अवैध हैं। क्योंकि इनके लिए न तो अनुमति ली गई है और न ही अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी)।
शहर के ईशन नदी पुल पर बनी दुकानों के ऊपर भारी भरकम लोहे के फ्रेम लगवाए गए हैं। जिनका वजन क्विंटलों में है। इन फ्रेम पर होर्डिंग लगवाने के लिए मकान मालिक किराया वसूल करते हैं। ये पूरी तरह अवैध हैं। क्योंकि शहरी क्षेत्र में किसी भी निर्माण से पूर्व अनुमति व एनओसी लेना जरूरी है। ऐसे में जब बात किसी व्यावसायिक निर्माण की हो तो ये और भी अधिक जरूरी हो जाता है। जिले में सारे नियमों को ताक पर रख दिया गया है।
शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले ईशन नदी पुल पर स्थित सालों पुरानी दुकानों पर होर्डिंग फ्रेम लगे हैं। इसके लिए न तो नगर पालिका से कोई अनुमति ली गई है और न ही विनियमित क्षेत्र के अधिकारी से। किसी भी निर्माण के लिए विनियमित क्षेत्र से अनुमति ऐसे ही नहीं मिल जाती है। इसके लिए बाकायदा विभागीय अभियंता निरीक्षण कर बिल्डिंग की मौजूदा स्थित का परीक्षण करने के साथ ही बिल्डिंग की वजन सहने की क्षमता का भी आकलन करते हैं। उसी के अनुसार निर्माण कार्य की लंबाई-चौड़ाई की अनुमति दी जाती है।
ईशन नदी पुल पर दुकानों पर ऊपर लगे भारी-भरकम होर्डिंग आंधी में कई बार टूट चुके हैं। गनीमत ये रही है कि रात के दौरान इनके टूटने से कोई हादसा नहीं हुआ। फिर भी न तो दुकान के मालिकों ने सबक लिया और न ही जिला प्रशासन ने। शहर में व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी नगर पालिका की होती है, लेकिन नगर पालिका को इन होर्डिंग फ्रेम से कोई लेना देना नहीं है। रोड के किनारे लगे बैनरों के लिए पालिका राजस्व वसूल करती है। इसके लिए ठेका उठाया जाता है, लेकिन निजी बिल्डिंगों के ऊपर लगे फ्रेम के लिए नगर पालिका जिम्मेदार नहीं है।
छतों पर लगे होर्डिंग फ्रेम अवैध हैं। इसके लिए कहीं से भी कोई अनुमति नहीं ली गई है। सड़क किनारे लगे होर्डिंग के लिए ठेका जरूर उठाया गया है। इसके लिए बाकायदा धनराशि वसूल की गई है।
रामअचल, कर अधीक्षक, नगर पालिका।