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फोटो - ताज बचाने को प्रदूषण पर शिकंजा, भट्ठियों में धधक रहा कोयला

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ताज बचाने को प्रदूषण पर शिकंजा, भट्ठियों में धधक रहा कोयला
जिला प्रशासन के सर्वे में 250 से अधिक होटल, मैरिज होम और ढाबे चिन्हित
एक सप्ताह में पूरा करना है सर्वे, 25 सितंबर से पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजाबाद। ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए बड़ी कवायद हो रही है। ताज संरक्षित जोन में कोयले पर प्रतिबंध है। इसके बाद भी होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट में कोयला खपाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित टीम ने कोयले का प्रयोग करने वाली इकाईयां चिन्हित करनी शुरू कर दी हैं। अभी तक 250 से अधिक इकाईयां चिन्हित हुई हैं जहां भट्ठियां कोयले से धधक रही हैं।
टीटीजेड में बढ़ते प्रदूषण और ताजमहल के रखरखाव को लेकर एमसी मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने गत माह सुनवाई के दौरान निर्देश दिए थे कि टीटीजेड में संचालित सभी कैटेगरी की प्रदूषणकारी इकाइयों का सर्वे कर रिपोर्ट सौंपी जाए। मंडलायुक्त ने सभी केटेगिरी की श्रेणी की प्रदूषणकारी इकाइयों का सर्वे कराने के लिए डीएम को निर्देश दिए। डीएम नेहा शर्मा ने प्रदूषणकारी इकाइयों के सर्वे के लिए चार अलग-अलग टीमें गठित की हैं। चारों टीमें अलग-अलग कांच इकाइयों, होटल, रेस्टोरेंट, हास्पिटल का सर्वे कर डीएम को रिपोर्ट सौंपेंगी। सर्वे के लिए टीम में उद्योग विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, श्रम विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है।
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सात दिन में सर्वे पूरा करना है। 25 सितंबर से पहले रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होगी। जिला प्रशासन ने जनपद में कराए सर्वे में अभीतक 250 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज होम, धर्मशालाएं, ढाबे चिन्हित किए हैं। इसमें दर्जनों ऐसे मैरिज होम, धर्मशालाएं, ढाबे, शामिल हैं, जहां कोयले से भट्ठियां सुलग रही हैं।

सर्वे के लिए टीमों के क्षेत्र हैं निर्धारित
चार टीमों में से पहली टीम ब्लाक खैरगढ़, आसफाबाद चौराहा से मक्खनपुर क्षेत्र, सैलई, आसफाबाद से मटसेना, फतेहाबाद रोड तक सर्वे करेगी। दूसरी टीम लेबर कालोनी, नगला विश्नू, रामनगर, छारबाग, बासठ, चंद्रवार गेट, जैन मंदिर से रसूलपुर, आजाद नगर, संतनगर क्षेत्र, तीसरी टीम तहसील टूंडला का क्षेत्र और चौथी टीम जैन मंदिर से उसायनी तक, स्टेशन रोड, कोल साइड रोड, कोटला मोहल्ला, जैन मंदिर से आसफाबाद चौराहे तक सर्वे करेगी।
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पहले बंद कराई थीं कोयले की भट्टियां
तत्कालीन मंडलायुक्त के राममोहन राव के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम ने अभियान चलाकर कोयले से जलने वाली भट्टियां बंद कराई थीं। अफसरों की निगाहें पलटने के साथ हाइवे, सर्विस रोड, प्रमुख बाजार, रेलवे स्टेशन के आसपास कई ऐसे ढाबे हैं, जहां आज भी कोयला से चल रही भट्टियां धुआं उगल रही हैं।
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