एटा। जिला खाद्य एवं विपणन विभाग के चार कर्मचारी फर्जी मेडिकल रिपोर्ट पर छुट्टी चल गए। इनको विभागीय अधिकारियों का संरक्षण मिलने की वजह से कोई पड़ताल तक नहीं की गई। जब चुनाव में कर्मचारियों की जरूरत पड़ी तो अपनी गर्दन बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद इस तरह की कोई भी रिपोर्ट न बनाने का खुलासा हुआ है।
खाद्य एवं विपणन विभाग में तैनात प्रबल प्रताप कुशवाह, अजीत कुमार, सुरेंद्र सिंह और आलोक रंजन गौतम ने विभाग से लंबी छुट्टी लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग से प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। इनके परीक्षण के लिए एक बोर्ड गठित किया गया था, बोर्ड ने सभी का एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कराया था। जिसमें सभी फिट पाए गए थे, इसके बाद कोई भी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। लेकिन कर्मचारियों ने विभागीय अधिकारियों की मिली भगत के चलते परीक्षण रिपोर्ट में फिट होने के बावजूद छुट्टी चले गए। चुनाव आया तो प्रशासन का डंडा चलने लगा ऐसे में तीन कर्मचारी तो वापस आ गए लेकिन प्रबल प्रताप कुशवाह का आज तक कोई अता पता नहीं है। ऐसे में अधिकारियों की गर्दन फंसी तो उन्होंने अपने बचाव में मेडिकल रिपोर्ट का सत्यापन जिला अस्पताल से कराया। गुरुवार को सीएमएस ने बोर्ड के सदस्य डाक्टरों को बुलाकर पुष्टि की तो पता चला कि इस तरह की कोई रिपोर्ट बोर्ड की ओर से तैयार नहीं की गई है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी प्रज्ञा शर्मा का कहना है कि चारों कर्मचारी छुट्टी गए थे इन्होंने मेडिकल रिपोर्ट लगाई थी। तीन वापस आ गए हैं लेकिन अभी तक प्रबल प्रताप कुशवाह वापस नहीं आए हैं। इनकी रिपोर्ट सत्यापन के लिए भेजी गई है।
जिला अस्पताल से मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर चार कर्मचारी छुट्टी गए थे, उनका सत्यापन कराया गया है। बोर्ड के डाक्टर सदस्यों से पुष्टि की गई तो उन्होंने इस तरह की कोई रिपोर्ट लगाने से इंकार किया है।
डा. राजेश कुमार अग्रवाल, सीएमएस