फिरोजाबाद। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर आपूर्ति में घपलेबाजी का मामला परत-दर-परत खुलना शुरू हो गया है।
सूत्रों की मानें तो जांच टीम ने फर्नीचर गुणवत्ता के अनुरूप नहीं होने की रिपोर्ट जुलाई 2018 में दी थी। इसके बाद विभाग ने उक्त ठेकेदार का भुगतान दिसंबर माह में विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से क्यों करा दिया। इसमें विभाग की मिलीभगत भी उजागर हो रही है।
जिले के नारखी एवं टूंडला ब्लाक के 110 उच्च प्राथमिक स्कूलों को 35 बैंच एवं डेस्क के हिसाब से फर्नीचर मैं. गोविंदा फर्नीचर द्वारा आपूर्ति किया था। गुणवत्ता पर उठे सवालों के चलते डीएम नेहा शर्मा ने जांच कराने का निर्णय लिया।
जून 2018 में डीएम ने टूंडला एवं नारखी ब्लाक के 110 स्कूलों की जांच एक्सईएन ग्रामीण अभियंत्रण सेवा संजय अग्रवाल, मत्स्य अधिकारी श्रीकिशन शर्मा को सौंपी थी। जांच टीम ने नारखी के उच्च प्राथमिक स्कूल मोईनउद्दीनपुर, पानीगांव व जाटऊ तथा टूंडला ब्लाक के दिनौली व खेरिया जारखी में आपूर्ति किए फर्नीचर की गुणवत्ता को परखने के साथ वजन कराया।
इन स्कूलों की जांच में बैंचों में प्रयुक्त बोर्ड की 2.38 स्क्वायर मीटर के स्थान पर 2.313 स्क्वायर मीटर मिला। इसमें प्रयुक्त एंगल आयरन का वजन 46.62 किलोग्राम के स्थान पर तो 43.33 किलोग्राम निकला। जांच टीम ने 257.66 रुपया प्रति डेस्क एवं बेंच थ्रीसीटर की कटौती किए जाने की संस्तुति की थी।
जांच टीम को एक दो स्कूलों में फर्नीचर भी टूटा मिला था। जांच टीम ने इसको ठीक कराए जाने तक की संस्तुति की थी।
इससे यह सवाल उठता है कि जांच टीम ने जुलाई 2018 में ही फर्नीचर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे तो फिर दिसंबर 2018 में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से इसका भुगतान क्यों करा दिया गया। इससे विभाग के अफसरों की मिलीभगत उजागर हो रही है।