फिरोजाबाद। टमाटर सॉस के नाम पर बेचे जा रहे नकली सॉस के कारोबार का एक बार फिर भंडाफोड़ हुआ है। रसायनिक रंगों एवं अरारोट को मिलाकर यह सॉस बनाया जा रहा था। टीम ने गुरुवार को नकली सॉस बनाने वाली इकाई पर छापेमारी की। नकली सॉस और केमिकल के नमूना लेकर जांच को भेज दिया है। वहीं, अलग-अलग स्थानों से 300 किलो से भी अधिक सॉस को सीज कर दिया गया। कार्रवाई से हड़कंप मच गया।
टीम ने सरस्वती नगर गली नंबर दो में सॉस निर्माण इकाई पर छापेमारी की। यह फर्म सतीशचंद्र संचालित करते हैं। टीम ने देखा कि सॉस में एसीटिक एसिड, स्टार्च पाउडर, सैकरिन, केमिकल रंग से लाल सॉस एवं हरा सॉस को तैयार किया जा रहा था।
टीम ने लाल एवं हरा सॉस, स्टार्च पाउडर, सैकरीन और रंग का नमूना लिया। साथ ही पांच लीटर के 15 डिब्बे सीज कर दिए हैं। जबकि यह सॉस टमाटर सॉस के नाम से बेचा जा रहा था। कार्रवाई में जिला अभिहित अधिकारी सैय्यद शाहनवाज हैदर आबिदी एवं मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी बीएस कुशवाह भी मौजूद रहे।
खाद्य विभाग की टीम ने आसफाबाद क्षेत्र में छापेमारी की। संजय एग सेंटर का निरीक्षण किया गया गया, जो बिना पंजीकरण के व्यवसाय करता पाया गया। मौके पर भंडारित लाल सॉस का नमूना लिया। साथ ही 500 ग्रामजन के 300 पैकेट सॉस को जप्त किया है।
टीम ने एग सेंटर से सॉस ले जाने वाले चाऊमीन एवं अंडा विक्रेताओं की ठेल की भी जांच की। वहां भी नकली सॉस उपयोग किया जा रहा था। टीम ने ठेल से भी सॉस को सीज किया। वहीं, दूध वाली गली में विशाल ट्रेडर्स का निरीक्षण किया।
फर्म स्वामी विशाल झिंदल लाइसेंस श्रेणी में होकर पंजीकरण प्राप्त कर ही व्यवसाय करते पाए गए। बिना लाइसेंस व्यवसाय करने पर मुकदमा दर्ज किया है।
नकली सॉस के कारोबार का पूर्व में चार बार भंडाफोड़ हो चुका है। दो बार न्यू रामगढ़ क्षेत्र में नकली सॉस का कारोबार पकड़ा जा चुका है। वहीं, एक बार महादेव नगर में यह इकाई संचालित थी। वहां भी यह कारोबार होता था। मगर आरोपी पर सख्त कार्रवाई न होने पर यह नकली कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है।
पिछली बार टीम ने सॉस को कागजों में नष्ट करा दिया था, मगर हकीकत में सॉस को नष्ट नहीं कराया गया था। छापेमारी के बाद फिर से यह कारोबार चलता रहा।
दुकानों पर होता है सप्लाई
फिरोजाबाद। निर्माण इकाई से नकली सॉस का पैकेट 10 रुपये में आठ सौ ग्राम बेचा जाता है। इसे पेटीज, अंडा विक्रेता के यहां बेचा जाता है। करीब ड्रमों में अधूरा पका हुआ नकली सॉस रखा हुआ था।
कार्रवाई की प्रक्रिया जटिल
फिरोजाबाद। खाद्य पदार्थों में जो नमून मानव जीवन के लिए हानिकारक साबित होते हैं। उन मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया बहुत जटिल है। नमूना फेल होने के बाद खाद्य आयुक्त लखनऊ को मुकदमा दर्ज कराने की स्वीकृति के लिए पत्रावलियां भेजी जाती हैं। आयुक्त की स्वीकृति मिलने के बाद एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया जाता है। ऐसे में कार्रवाई में देरी होने से नकली खाद्य पदार्थों का कारोबार तेजी से फलफूल रहा है।
स्वास्थ्य के लिए खतरा
- नकली सॉस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जब रसायन शरीर में घुलेगा तो निश्चिततौर पर आंतों को नुकसान पहुंचाएगा। किडनी भी प्रभावित होती हैं। इसलिए इस सॉस के खाने से बच्चों को बचाना चाहिए।
-डा. गरिमा दीक्षित, सेवार्थ संस्थान ट्रामा सेंटर
- नकली सॉस खाने से लीवर और गुर्दे को भारी नुकसान होता है। शुरुआत में फूड प्वाइजिंग हो जाती है। उल्टी, दस्त हो जाते हैं। अगर ज्यादा समय तक इसका सेवन किया जाए तो शरीर में बीमारियां बन जाती हैं। -डा. डीके गुप्ता, वरिष्ठ फिजिशियन