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खर्च नौ हजार का, वसूल रहे 22 हजार

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घंटाघर पार्क में लगी सोलर लाइट
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एटा। जिले में सोलर लाइटों के नाम पर बड़ा गोलमाल किया गया है। ग्राम पंचायतों के जिम्मेदारों ने सोलर लाइटों के नाम पर सरकारी धन की जमकर लूट की है। आलम यह हुआ है कि ग्राम पंचायतों में नौ हजार में रुपये में सोलर लाइट लगी है। जबकि फर्जी बिल वाउचर लगाकर 22 हजार रुपये का खर्च दिखाया गया है। जिला प्रशासन भी मामले की जांच को लेकर अनदेखी कर रहा है।
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पिछले दिनों प्रदेश स्तर पर सोलर लाइटों को लेकर भ्रष्टाचार सामने आने के बाद प्रमुख सचिव ने सभी ग्राम पंचायतों को नेडा के जरिए सोलर लाइटें क्रय करने के आदेश दिए थे। मगर नेडा से अब तक महज दो ग्राम पंचायतों ने सोलर लाइटें ली हैं। जबकि जिले की 576 ग्राम पंचायतों में से अब तक 200 से ज्यादा ग्राम पंचायतें सोलर लाइटों से रोशन हो रही हैं। इससे साफ है कि ग्राम पंचायतों में सोलर लाइट के नाम पर बड़ा गोलमाल हो रहा है।

ऐसे होता है खेल
सोलर लाइटों के नाम पर ग्राम पंचायत के जिम्मेदार बड़ा खेल करते हैं। गांव में विकास कार्य दिखाने के लिए ग्राम प्रधान प्राइवेट संस्थाओं से महज नौ हजार रुपये में सोलर लाइट लगवा लेते हैं। जबकि ग्राम निधि खाते से सोलर लाइट मद में आने वाले 22 हजार रुपये का भुगतान लिया जाता है। जिले की अधिकतर ग्राम पंचायतों में कुछ ऐसे ही मामले सामने आए हैं।
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जांच में खराब पाई गई लाइटें
जिले में पिछले दिनों अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों की जांच कराई थी। जिसमें अधिकतर ग्राम पंचायतों में सोलर लाइटें खराब पाई गई थीं। ग्राम प्रधानों और सचिवों को नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

दो करोड़ रुपये का हुआ खेल
जिले में सोलर लाइटों के नाम पर करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का गोलमाल किया गया है। जिले की करीब 200 ग्राम पंचायतों में सोलर लाइटें लग चुकी हैं। अमूमन एक ग्राम पंचायत में 10 सोलर लाइट लगाई गई हैं। जिनका पूरा गणित साढ़े चार करोड़ रुपये का होता है। ग्राम पंचायत के जिम्मेदार प्राइवेट फर्म से सोलर लाइट लगवाकर सीधे तौर पर एक लाइट पर 10 हजार रुपये बचाते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए, तो जिले में दो करोड़ रुपये का खेल किया गया है। प्रशासन जांच कराता है, तो मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है।

शासन ने ग्राम पंचायतों को नेडा से ही सोलर लाइटें क्रय करने के आदेश दिए हैं। जिले में अब तक महज दो ग्राम पंचायतों ने सोलर लाइटें लगवाई हैं। इसे लेकर कई बार बैठक में वार्ता भी हुई है, लेकिन ग्राम पंचायतें निजी फर्मों से ही सोलर लाइटें लगवाती हैं।
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आनंद प्रकाश दीक्षित, परियोजना अधिकारी, नेडा
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