मथुरा। रिपोर्ट कुछ भी कहती रहे। बचपन भले ही हड्डियों के ढांचे में तब्दील हो जाए। लेकिन अफसरों ने जो रिपोर्ट दी है उसके मुताबिक 45 गांव कुपोषण मुक्त कर दिए गए हैं। इन गांवों में जो 354 अति कुपोषित बच्चे थे उन्हें भी सेहतमंद बनाने का दावा किया जा रहा है।
राज्य पोषण मिशन योजना के तहत नवजात से पांच साल तक के बच्चों को कुपोषण मुक्त करने को लेकर बच्चों के लिए पोषण दिया जाता है। लगातार बढ़ते जा रहे कुपोषण के तहत अक्तूबर 2017 में 60 अफसरों को गांव गोद देकर वहां रह रहे कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने और कुपोषण मुक्त करने के आदेश दिए गए। इसमें अफसरों ने गणेशरा, तंतूरा, सतोहा, असगरपुर, भरतिया, बिलौठी, फतिहा, नगला चंद्रभान, चौकीपुरकलां, जफर नगर, धाना शमशाबाद, धाना तेजा, हसनपुर, गढ़ी रामबल, खानपुर, सौनोंठ जनूबी, सेहा सिहाना, राधाकुंड ग्रामीण, नगला धनुआ, अचरू लद्यौरा, इस्लामपुर, पांडल, सुल्तानपुरा, नागल, भंकरपुर बसेला, सुर्रका, जोनाई, बरका, ऊंदी, बोरपा, धर्मपुरा, नवीपुर, सनौरा, बामौली, खानपुर, रांकौली, बना, नवादा, नगरी, राजपुर बांगर, डाहरौली, डिरावली, आदमपुर, गढ़ी भीमा, थोक ज्ञान, जोगीपुरा गांव को कुपोषण मुक्त किया है।
अफसरों का दावा है कि उन्होंने 10 माह मेें 354 अति कुपोषित बच्चों को खिला पिलाकर स्वस्थ कर दिया। कुपोषण मुक्त किए गए इन गांवों की रिपोर्ट डीएम ने शासन को भेजी है।