मैनपुरी। जिले में 462 गावों के प्रधानों और पंचायत सचिवों पर जिला पंचायत राज विभाग की ओर से एफआईआर कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर एडीओ को सूची बनाकर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। डीएम की ओर से इन ग्राम पंचायतों के खातों को पहले ही ब्लॉक किया जा चुका है।
शासन की ओर से 14वें वित्त आयोग में ग्राम पंचायतों में विकास कार्य के लिए धनराशि आवंटित की जाती है। प्रधान की ओर से इस धनराशि का प्रयोग ग्राम पंचायत में जरूरत वाली जगह पर कर उपभोग प्रमाणपत्र जिला प्रशासन को सौंपना होता है। वहीं, संपूर्ण कार्य का पूरा ब्योरा ऑनलाइन अपडेट कराना होता है लेकिन जिले में 462 प्रधानों ने न ही उपभोग प्रमाणपत्र जमा किया और न ही कार्य का ब्योरा ऑनलाइन अपडेट कराया है।
इस कारण डीएम ने इन सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों के खातों को बंद करा दिया था। विकास के लिए भेजी जाने वाली धनराशि की किस्त को भी रोक दिया गया था लेकिन इसके बाद भी प्रधानों ने उपभोग प्रमाणपत्र जमा करना उचित नहीं समझा। अब जिला पंचायती राज विभाग की ओर से ग्राम प्रधान और सचिवों पर रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है।
जिले में वर्तमान में 552 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से सिर्फ 90 ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने सरकारी प्रक्रिया को पूरा किया है। जिला प्रशासन की ओर से इन प्रधानों के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिले की ग्राम पंचायतों में पिछले सत्र में 5613.28 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। 462 ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने अभी तक उपभोग प्रमाण पत्र जमा नहीं किए हैं। वहीं कार्य का डाटा भी अपलोड नहीं किया है। इसके चलते इन प्रधानों के खातों को बंद कर दिया गया था। अब रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है।