कुरीतियों से लड़ीं प्रधान, सीएम ने किया सम्मान
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एटा/ मिरहची। बाल विवाह, दहेज, भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों से दबे ग्रामीण परिवेश में जागरूकता पैदा की। पुरुष प्रधान समाज में जिले की महिला प्रधानों ने जो किया, उसे सुनकर खुद मुख्यमंत्री भी खुश हुए। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को लोक भवन मेें जिले की तीन महिला प्रधानों को रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से नवाजा। जब मंच से प्रधानों के काम का ब्यौरा पेश किया, तो दर्शक भी स्तब्ध रह गए। जी हां जिले की महिला प्रधान लक्ष्मी देवी, मुन्नी और नीरू ने अपनी ग्राम पंचायतों मेें विकास की नई इबारत लिखी है। पढ़िए रिपोर्ट...
घरेलू हिंसा से लड़ी मुन्नी देवी
सकीट ब्लॉक के गांव थरौली की प्रधान मुन्नी देवी ने घरेलू हिंसा से जमकर दो-दो हाथ किए। उन्होंने गांव में विधवा, पुनर्विवाह के साथ स्वरोजागर के प्रति महिलाओं को प्रेरित किया। महिलाओं में खुले में शौच के खिलाफ अलख जगाई। मुन्नी देवी आए दिन गांव के स्कूल में मिड-डे मील चेक करती हैं। पौधरोपण, गोसेवा और गोरक्षा के साथ-साथ कन्या भ्रूण हत्या और बेटी बचाओ के मुद्दे पर काम कर रही हैं।
प्रधान ने लगाई बाल विवाह पर लगाम
अवागढ़ ब्लॉक के गांव नरौरा की प्रधान कु. नीरू ने भी गांव में विकास की गंगा बहाई। उन्होंने गांव में विद्युतीकरण, अवैध कब्जों को हटवाने, सड़क निर्माण, पौधरोपण, तालाब खुदाई के साथ पशु चिकित्सालय का निर्माण और व्यवस्था सुधार पर जोर दिया। साथ ही गांव में बाल विवाह पर रोक लगाकर नारी सुरक्षा के मुद्दे को सार्थक किया।
लक्ष्मी ने वापस की सरकारी लक्ष्मी
जिले के विकासखंड मारहरा की प्रधान लक्ष्मी को भी सीएम ने लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से नवाजा। उनको यह पुरस्कार गांव को ओडीएफ करने के साथ 10 लाख रुपये की राशि को वापस किया। इसके साथ ही उन्होंने दहेज उत्पीडन के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई।