जनता की समस्याओं और शिकायतों को निपटाने के दावे करनी वाली केंद्र और प्रदेश सरकार को जिले के अधिकारियों ने ठेंगा दिखा दिया है। जिले में पीएम और सीएम के आदेशों वाली शिकायतें तक नहीं निपट रही हैं। ऐसे में जनता की समस्याएं कैसे निपटती होंगी। शिकायत निस्तारण प्रणाली में जिले दर्जन भर विभाग डिफाल्टर घोषित हो गए हैं। जबकि समाधान दिवस की 51 शिकायतें डिफाल्टर हैं। ऐसे में कई अधिकारियों का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है।
सरकार ने जनता की समस्याओं को सुनने के लिए जनसुनवाई पोर्टल बनाया है। इन शिकायतों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के साथ-साथ तमाम अधिकारियों को ऑनलाइन भेजा जाता है। जिनका संबंधित अधिकारियों को 15 दिन में निपटारा करना होता है, लेकिन शिकायतों को निपटाने में कोई रुचि नहीं ले रहा है। शिकायतों का निपटारा नहीं होने से कई विभाग डिफाल्टर हो गए हैं। जिले में पीएम संदर्भ की छह, सीएम की 11, डीएम की 46, संपूर्ण समाधान दिवस की 51 और ऑनलाइन प्राप्त 81 शिकायतों का निपटारा अब तक नहीं हो सका है। इसमें सबसे ज्यादा शिकायतें जिला पंचायत राज, जिला पूर्ति अधिकारी, एलडीएम, सीडीओ, एसडीएम और तहसीलदार स्तर की हैं। शासन से फटकार लगने के बाद पंचायती राज अधिकारी और डीएसओ का वेतन रोक दिया है। जबकि अन्य को प्रतिकूल प्रविष्टि देकर जवाब मांगा गया है। एडीएम न्यायिक राम अरज यादव ने बताया कि जिन शिकायतों का निस्तारण 15 दिन में नहीं होता है तो वो डिफाल्टर घोषित हो जाती हैं। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जिले की तहसीलों में लगने वाले संपूर्ण समाधान दिवस की शिकायतों का बुरा हाल है। पिछले दिनों आईं 3741 शिकायतों में 51 शिकायतें डिफाल्टर हो गई हैं।
डीपीआरओ टॉप पर
शिकायतों का निपटारा नहीं करने में डीपीआरओ टॉप पर हैं। इनके पोर्टल पर पीएम संदर्भ की तीन, डीएम संदर्भ की नौ, संपूर्ण समाधान दिवस की नौ और आनलाइन संदर्भ की आठ शिकायतें लंबित हैं। जिला पूर्ति अधिकारी पोर्टल पर सबसे ज्यादा 16 ऑनलाइन आई शिकायतें लंबित पड़ी हैं। जबकि डीएम स्तर की पांच, संपूर्ण समाधान दिवस और पीएम संदर्भ की एक शिकायत का निपटारा नहीं हुआ है।
ये हैं आंकड़े
13436 शिकायतें हुईं अब तक प्राप्त
195 शिकायतें निपटारा नहीं होने से डिफाल्टर
184 शिकायतों में लग चुकी है आख्या
15 दिन में करना होता है शिकायतों का निपटारा