वृंदावन (मथुरा)। प्रशासन की नई पहल से ठाकुर बांकेबिहारी जी के विश्राम में चार घंटे की कटौती होगी। भक्तों को सुविधा तो मिलेगी लेकिन उनके आराध्य लाडले प्रभु के दर्शन, शयन के समय में परिवर्तन, नित्य सेवा विधि का क्रम भी प्रभावित होगा। सेवायतों का कहना है इस व्यवस्था से पांच सौ साल पुरानी परंपरा टूट जाएगी।
ब्रज में भक्त अपने आराध्य ठाकुर को लाड़ लड़ाते हैं। इसमें सेवायतों द्वारा निश्चित समय अंतराल में झांकी, राजभोग, शयन कराई जाती है। लंबे समय से इन परंपराओं का निर्वहन किया जा रहा है। ये भक्तों की अपने आराध्य के प्रति अटूट आस्था ही है कि ठाकुर जी के सुबह जागने, भक्तों को दर्शन देने और शयन (आराम) का समय मौसम के अनुसार परिवर्तित भी किया जाता है।
वर्तमान में ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन प्रात: 8:55 बजे खुलते हैं, दोपहर 12:25 बजे उनके लिये राजभोग आता है। 12:55 बजे आरती के बाद ही ठाकुर जी आराम करते है। इसके बाद सायं 4:30 बजे दर्शन खुलते हैं। 7:35 बजे भोग आता है रात्रि 8:25 बजे शयन आरती के बाद ठाकुर जी विश्राम करते हैं। दर्शनों से पूर्व सफाई, ठाकुर जी का शृंगार आदि सेवाएं भी होती हैं।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ठाकुर बांकेबिहारी जी के दर्शनों के समय में बढ़ोत्तरी किए जाने की पहल की है। नई व्यवस्था में दर्शन के समय में चार घंटे की बढ़ोत्तरी की बात कही जा रही है। ऐसे में दर्शनों का समय सुबह बढ़ाया जाए या फिर दोपहर और या रात्रि को। दर्शनों के समय में बढ़ोत्तरी करोड़ों श्रद्धालुओं के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी जी के आराम के समय में कटौती से ही संभव हो सकेगी।
सेवायत बोले, ठाकुर जी को होगा कष्ट, टूट जाएगी प्राचीन परंपरा
सेवायत ब्रजकिशोर गोस्वामी के अनुसार ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के दर्शन अवधि बढ़ाए जाने की योजना से ठाकुरजी की सेवा पद्धति में परिवर्तन होगा। जिससे ठाकुरजी की 500 वर्ष पूर्व आचार्यों द्वारा बनाई गई परंपरा टूट जाएगी। गोपेश गोस्वामी ने कहा ठाकुर बांकेबिहारी महाराज साधारण विग्रह मात्र न होकर स्वामी हरिदास की सेवा भावना और प्रेम का मूर्तिमान स्वरूप हैं। ऐसे में परंपरा टूटने से ठाकुर जी को कष्ट पहुंचेगा।
बांकेबिहारी मंदिर में आते हैं हर साल 1.25 करोड़ श्रद्धालु
वृंदावन। वृंदावन का ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर देश के उन चुनिंदा धार्मिक स्थलों में शुमार है जहां हर साल एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वृंदावन में हर साल 1.25 करोड़ श्रद्धालुओं आगमन होता है।