आगरा। शहर के मुकाबले देहात के वोटर एक बार फिर ज्यादा जागरूक रहे। 2012 के निकाय चुनाव में भी नगर निगम के मुकाबले नगर पालिका और नगर पंचायतों में ज्यादा वोट डाले गए थे। इसकी वजह प्रशासन की ओर से मतदाता जागरूकता अभियान पर ध्यान न दिया जाना भी मानी जा रही है।
जैसे विधानसभा चुनाव में मॉडल बूथ और सेल्फी प्वाइंट बनाए गए, वैसे इस बार कहीं नजर नहीं आए। सेल्फी प्वाइंट से युवाओं में खासा उत्साह आ गया था। इस बार वे मायूस हुए। विधानसभा चुनाव में प्रशासन ने स्कूलों में प्रतियोगिताएं कराई थी। एनजीओ की मदद से मतदाता जागरूकता रैलियां निकाली थीं। इस बार ऐसा कुछ भी नहीं किया गया।
इस बार काफी लोगों के पास मतदाता पर्चियां भी नहीं पहुंची। इसके बावजूद देहात ने वोट डालने में ज्यादा जागरूकता दिखाई। इसकी वजह यह भी रही कि देहात में शहर के मुकाबले चुनाव के दौरान ज्यादा टकराव हुआ था। हाई वोल्टेज चुनाव था, इसलिए वोटिंग भी हाई पहुंच गई।
अगर 2012 से तुलना करें तो नगर निगम में 3.62 फीसदी वोट ज्यादा पड़े हैं। तब सीकरी में 65.06, एत्मादपुर में 65.23, अछनेरा में 69.33, बाह में 69.13, शमसाबाद में 68.19, किरावली में 73.37, जगनेर में 64.15, खेरागढ़ में 67.24, स्वामीबाग में 59.39, फतेहाबाद में 59.80 और पिनाहट में 59.80 फीसदी वोट डाले गए थे। इस बार भी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों ने बाजी मारी हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में फतेहाबाद जिले में अव्वल आया था।