कासगंज। जिले में अभी बाढ़ से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं। शनिवार को फिर नरौरा से 17 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बढ़ गया। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी और बढ़ने के आसार हैं। इलाके में लंबे समय से जलभराव के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। इन इलाकों में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय नहीं हैं। बाढ़ से लोगों का जीवन अस्त व्यस्त है।
गौरतलब है कि नरौरा से शुक्रवार को 177274 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज था। जो शनिवार को बढ़कर 194074 क्यूसेक हो गया। इस तरह जलस्तर में 17 हजार क्यूसेक की बढ़ोत्तरी हो गई। कछला ब्रिज के गेज में भी 5 सेमी जलस्तर बढ़ गया।
शुक्रवार को जलस्तर 163.65 मीटर के निशान पर था, जो शनिवार को 163.70 पर पहुंच गया। बढ़ते जलस्तर के चलते लहरा, कादरवाड़ी, कुबेरनगर, तारापुर, मनकापुर, मुफ्फर नगर, शहवाजपुर आदि इलाकों में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने हालातों का जायजा लिया। शहवाजपुर बांध मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता कमलेश कुमार अन्य अभियंताओं की टीम प्रभावित इलाकों में पहुंची।
जनपद के दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त है। लोगों को हर समय गंगा के पानी के बढ़ने का खतरा सता रहा है। लच्छी नगला, पंखिया नगला में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित है।
कादरगंज, सुन्नगढ़ी, नगला टिकुड़ी, नगला मेहरी, गठैरा, नगला खिमाई, पनसोती, जिझौल, हिम्मतनगर, बझेरा किलौनी, किसौल, देवकली, नगला जयकिशन, नगला हंशी, सनौड़ी सिहिमन, नरदौली, राजेपुर कुर्रा, मेहोला समेत कई गांव में बाढ़ का प्रकोप बरकरार है। इन गांवों में पानी भरा रहने से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी प्रदूषित हो रहा है।
सहायक बाढ़ प्रभारी एके सिंह का कहना है कि नरौरा से शनिवार को पानी का डिस्चार्ज बढ़ा है, जिससे जलस्तर में वृद्धि हुई है। अभी मीडियम फ्लड के हालात बने रहने की उम्मीद है। क्योंकि पहाड़ों पर लगातार बारिश हो रही है।
डिस्चार्ज हुआ पानी-
नरौरा से 194074 क्यूसेक
बिजनौर से 119644 क्यूसेक
हरिद्वार से 59565 क्यूसेक
कछला गेज 163.70 के निशान पर