मरीजों की जान को लेकर बेपरवाह है स्वास्थ्य विभाग
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कासगंज। जिले में जिला चिकित्सालय सहित अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऑक्सीजन सिलेंडरों की उपलब्धता में तो पास हो गए, लेकिन यहां आग जैसी दुर्घटनाओं में बचाव के कोई इंतजाम नहीं हैं। जिला अस्पताल पर भी केवल दो ही अग्निशमन सिलेंडर लगे हुए हैं वे भी एक्सपायर हैं। मरीजों की जान को लेकर स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह है।
गोरखपुर में ऑक्सीजन की उपलब्धता न होने पर बच्चों की मौत की घटना के बाद अमर उजाला ने ऑक्सीजन सिलेंडरों की उपलब्धता एवं आग से बचाव के इंतजाम की जांच पड़ताल की। जिला अस्पताल में कुल छह ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध पाए गए। यहां आग की स्थिति से निपटने के लिए केवल दो अग्निशमन उपकरण मौजूद थे जो एक्सपायर रहे।
एक अग्निशमन यंत्र वर्ष 2002 का था, जबकि दूसरा अग्निशमन यंत्र 2008 का। किसी भी आग संबंधी दुर्घटना की स्थिति में निपटना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि आग की दुर्घटना का प्रकोप ऑक्सीजन मिलते ही और तेज हो जाता है। जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी हालत बेहद खराब हैं।
पटियाली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह, सोरों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तीन ऑक्सीजन सिलेंडर मिले। आग से निपटने का कोई इंतजाम नहीं था। पूर्व में अस्पतालों में हुईं आग की दुर्घटनाओं से भी स्वास्थ्य विभाग ने सबक नहीं लिया है।
सीएमओ डा. रंगजी दुबे का कहना है कि जिले में सभी चिकित्सालयों पर पर्याप्त ऑक्सीजन की व्यवस्था है। प्रतिमाह 12 से 14 सिलेंडरों की खपत होती है। सभी एंबुलेंस में भी ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। ऑक्सीजन सप्लायर का कोई पुराना बकाया नहीं है। जबकि अग्निशमन उपकरणों के के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने बताया नवीन जिला चिकित्सालय भवन में सभी व्यवस्थाएं की जा रहीं हैं।