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आर्थिक सहायता को तरस रहे परिवार

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आगरा में हुए हादसे में घायल युवक।
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एटा/अवागढ़। लला, न कोऊ मदद करन आयो और ना ही काऊ ने खैर-खबर लई। बेटा, हमाई तो हालत ऐसी ना है कि महंगो इलाज करा लें, जासे गांव के ही डाक्टर तैं मरहम पट्टी कराय लई है। हमै पता होती तो हम तौ कबऊ न जाते। आंसूओं को रोकते हुए वृद्धा कमला देवी की जुबां कुछ यूं ही लड़खड़ाने लगी। दर्द, बेबसी और कराह के साथ सरकारी उपेक्षा ने उनको तोड़ दिया है।
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हादसे ने खुशियां छीन लीं, तो रहनुमाओं ने भी मुंह मोड़ लिया। गांव सिकरारी में इन दिनों कुछ ऐसा ही आलम हैै। आगरा में हुए हादसे के बाद जिले के छह लोगों की मौत हुई, तो गांव के 17 लोग घायल हुए। मगर अब तक कोई भी सरकारी सहायता और नेता गांव नहीं पहुंचा है। इसे लेकर ग्रामीणों में रोष है।
गांव सिकरारी के परिवार आर्थिक सहायता की आस लगाए बैठे हैं। किसी ने अपना पंाव खोया है, तो किसी की पसलियां टूटी हैं।

आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि महंगा इलाज करा सकें। गांव की 70 वर्षीय वृद्धा कमला देवी के सीधे हाथ की हड्डी टूटी है और सीने की पसलियों में दर्द है। आगरा में इलाज के लिए भर्ती कराया गया, तो आपरेशन के लिए 45 हजार रुपये मांगे गए। आर्थिक तंगी के चलते परिजन वृद्धा को गांव ले आए। गांव के सोनू पुत्र श्रीचंद्र के भी पैर और सिर में चोट है। वहीं टिंकू पुत्र कुंवरपाल के भी हाथ में चोट लगी है। आर्थिक स्थिति सही न होने से परिजन गांव में ही झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं।
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घाव कहीं, पट्टी कर दी कहीं
हादसे के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए गए घायलों के इलाज में भी मनमानी की गई है। गांव सिकरारी के घायल विष्णु पुत्र विजय के सिर में बाईं तरफ चोट थी और डाक्टरों ने दाईं ओर टांके लगाकर घर भेज दिया। हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन उसे इलाज के लिए दोबारा आगरा ले गए हैं।

दो घायलों की हालत गंभीर
गांव के अमर सिंह और गांव नगला केसरी के बलवीर सिंह की हालत नाजुक बनी हुई है। परिजन उनका आगरा में इलाज करा रहे हैं। शिवम पुत्र भूपेंद्र का इलाज एटा में चल रहा है। गांव के लोगों को कहना है कि सरकार को घायलों की मदद करनी चाहिए।
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