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जरा याद करो कुर्बानी: क्रांतिकारियों के लिए सुरक्षित केंद्र रहा ये कॉलेज, जानें रोचक इतिहास

Wed, 08 Aug 2018 06:48 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला वृंदावन (मथुरा)
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वृंदावन का ऐतिहासिक प्रेम महाविद्यालय
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वृंदावन में केशीघाट पर यमुना किनारे स्थापित प्रेम महाविद्यालय जंग-ए-आजादी का गोपनीय ठिकाना बना था। यह महाविद्यालय क्रांतिकारियों के लिए सुरक्षित ठिकाना ही नहीं बल्कि इस स्थान पर अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेने और आगामी आंदोलन की रणनीति
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बनाई जाती थी। 

इस महाविद्यालय में कई प्रमुख नेताओं ने छिपकर अंग्रेजों से लड़ने के लिए रणनीति बनाई थी। अंग्रेज हुकूमत के सक्रिय होने पर आजादी के दीवाने यमुना के रास्ते यहां से आराम से निकल भागते थे।

महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद आदि आजादी के दीवाने इस महाविद्यालय में आए और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ बड़ी-बड़ी योजनाओं के सूत्रधार रहे। 
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कॉलेज में दिया गया शस्त्र बनाने का प्रशिक्षण

राजा महेंद्र प्रताप का असली मकसद भारत से अत्याचारी ब्रिटिश शासन को समाप्त करना था। वर्ष 1914 में आगरा के अंग्रेज कमिश्नर और मथुरा के तत्कालीन कलेक्टर डेंपियर के सामने राजा महेंद्र प्रताप ने एलान किया था कि मैं अन्याय को राजगद्दी से हटा दूंगा और न्याय को गद्दी पर बैठा दूंगा।

इसी बात को लेकर मथुरा में कमिश्नर से उनकी झड़प हुई और उन्होंने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार कर प्रेम महाविद्यालय में तकनीकी शिक्षा के माध्यम से छात्रों को हथियार बनाने का प्रशिक्षण देने का कार्य शुरू कराया।

इस महाविद्यालय में डा. संपूर्णानंद, प्रोफेसर कृष्णचंद्र और आचार्य जुगल किशोर जैसी हस्तियों ने इस महाविद्यालय में छात्रों को शिक्षित किया है। इन हस्तियों में से डा. संपूर्णानंद तो उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री भी बने।
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