वृंदावन में केशीघाट पर यमुना किनारे स्थापित प्रेम महाविद्यालय जंग-ए-आजादी का गोपनीय ठिकाना बना था। यह महाविद्यालय क्रांतिकारियों के लिए सुरक्षित ठिकाना ही नहीं बल्कि इस स्थान पर अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेने और आगामी आंदोलन की रणनीति
बनाई जाती थी।
इस महाविद्यालय में कई प्रमुख नेताओं ने छिपकर अंग्रेजों से लड़ने के लिए रणनीति बनाई थी। अंग्रेज हुकूमत के सक्रिय होने पर आजादी के दीवाने यमुना के रास्ते यहां से आराम से निकल भागते थे।
महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद आदि आजादी के दीवाने इस महाविद्यालय में आए और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ बड़ी-बड़ी योजनाओं के सूत्रधार रहे।