फिरोजाबाद। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो परिवार नियोजन को लेकर पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा गंभीर है। पिछले दो साल में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की नसबंदी के आंकड़े पांच प्रतिशत भी नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के अंाकडे़ कहते हैं कि महिलाएं ही परिवार नियोजन की जिम्मेदारी उठा रही हैं।
लड़की हो या लड़के, बच्चे दो ही अच्छे..., स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर नजर डाली जाए तो परिवार नियोजन का यह नारा महिलाओं को अच्छी तरह समझ आ गया है, लेकिन पुरुषों को अभी भी इस नारे का महत्व समझने की जरूरत है। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत जिले में नसबंदी कराने वालों में महिलाएं नंबर वन साबित हो रही हैं। वर्ष 2016-17 के आंकड़ों पर जोर ड़ाले तो 2927 महिलाओं ने नसबंदी कराई है। वहीं, पुरुषों की संख्या मात्र 27 तक ही पहुंची। वहीं, वर्ष 2017-18 में अभी तक देखा जाए तो 230 महिलाएं ही नसबंदी करा चुकी हैं। किंतु एक भी पुरुष नसबंदी नहीं करा सका है।
महिलाएं हुई हैं जागरूक
जिला अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ ने बताया कि आजकल महिलाएं परिवार नियोजन के प्रति खुद व खुद जिम्मेदार हो गई हैं। पहले तो महिलाओं को समझाना पड़ता था लेकिन अब महिलाएं खुद ही नसबंदी कराने आ रही है। यहां तक कि जिनके परिवार में नसबंदी के लिए सास और पति आसानी से तैयार नहीं होते हैं वे महिलाएं चोरी छिपे भी नसबंदी कराने के लिए आ जाती हैं।
प्रोत्साहन राशि बढ़ाई
फिरोजाबाद। महिला नसबंदी के 1400 रुपये प्रोत्साहन राशि से बढ़ाकर दो हजार रुपये कर दी है वहीं, जब कोई पुरुष नसबंदी कराता है तो तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। अभी तक यह धनराशि दो हजार रुपये थी।