उर्वरक के साथ कीटनाशक दवाओं की बढ़ेंगी कीमतें
जीएसटी लगने पर दुकानदारों को कराना होगा पंजीकरण
किसान बोले डीजल को जीएसटी की श्रेणी में लाएं तो होगा लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजाबाद। जीएसटी लागू होने के बाद अन्नदाता के साथ ही फुटकर विक्रेताओं की चिंताएं बढ़ गईं हैं। सीधे उर्वरक और बीज की खरीदारी करके बिक्री करने वालों को अब पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। कीटनाशक दवा की कीमतों में बढ़ोतरी होने के संकेत मिले हैं। अभी तो 17.50 प्रतिशत कर लगता था लेकिन अब 18 प्रतिशत तक लग जाएगा।
किसानों को उर्वरक की दरों में पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है। कीटनाशक दवाओं में आधा प्रतिशत अधिक कर देना होगा। सबसे अधिक परेशानी बिना पंजीकरण कराए लाखों का व्यापार करने वाले विक्रेताओं को होगी। थोक विक्रेता बिना पंजीकरण वालों को उर्वरक और बीज नहीं दे सकेंगे। शिकोहाबाद में बीज और कीटनाशक दवा की बिक्री करने वाले मोहन सिंह कहते हैं कि जीएसटी लागू होने से कीटनाशक दवाएं महंगी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि जिले में 60 प्रतिशत से भी ज्यादा लाइसेंसधारक पंजीकृत नहीं थे। उन्हें अब पंजीकरण कराने पर ही मॉल मिलेगा। इससे सरकार की आय में इजाफा होगा लेकिन कीटनाशक दवाओं पर पहले 12.50 एक्साइज और पांच प्रतिशत वैट था इसके कारण 17.50 प्रतिशत था अब 18 प्रतिशत लगेगा। यूरिया, डीएपी व एनपीके पर उर्वरक पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगने से उर्वरक महंगी होगी। वहीं बीज पर पहले कोई कर नहीं था और न ही अब है।
बिना पंजीकरण के माल मिलना होगा मुश्किल
जिला कृषि अधिकारी,कृषि रक्षाधिकारी से लाइसेंस बनवाने के बाद सीधे कंपनियों से खाद,बीज की खरीदारी करके ही लाखों का व्यापार करने वालों को अब मॉल अब नहीं मिल सकेगा। जानकारों का कहना है कि सरकार कंपनी से माल निकलने के बाद अंतिम छोर तक कहां पहुंचा इसका पूरा ही ब्योरा रखेगी। टैक्स चोरी की संभावनाएं खत्म हो गईं।
-किसानों को सर्वाधिक प्रयोग होने वाले डीजल को सरकार को जीएसटी के अन्तर्गत लाना चाहिए। ताकि फसलों की ही सिंचाई सस्ती हो सके। सरकार को कीटनाशक दवाओं एवं उर्वरक में कर से मुक्त रखना चाहिए।
अमरनाथ शर्मा किसान