फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार दिन में एक भी संवासिनी को नहीं ढूंढ पाई पुलिस

विज्ञापन
- फोटो : Demo Pic
विज्ञापन
एत्माद्दौला के कालिंदी विहार स्थित राजकीय नारी संरक्षण गृह से 43 संवासिनियाें और उनके नौ बच्चाें को बिना किसी आदेश के छोड़ दिए जाने के मामले में पुलिस की जांच में ढिलाई नजर आ रही है। इन सभी संवासिनियों को फिर से गिरफ्तार किया जाना है लेकिन छोड़े जाने के बाद चार दिन बाद भी पुलिस एक को नहीं ढूंढ नहीं पाई है। जो लोग नारी निकेतन में खुद को संवासिनियों का अभिभावक बताकर उन्हें अपने साथ ले गए, उनके नाम-पते भी अभी तस्दीक नहीं किए गए हैं। उधर नारी निकेतन के अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं। पुलिस को इन लोगों के मोबाइल नंबर तक नहीं दिए हैं।
विज्ञापन


सभी सेक्स वर्कर इलाहाबाद सदर में देह व्यापार करती थीं। पांच मई 2016 को इन्हें वहीं से पकड़ा गया था। इसके बाद 20 मई 2016 को आगरा के नारी निकेतन में भेजा गया था। यहां से इन्हें बगैर किसी आदेश के 20 , 21, 22 मई 2017 को छोड़ दिया गया। एक जून को इस लापरवाही पर नारी निकेतन की अधीक्षक गीता राकेश को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद माना जा रहा था कि सभी सेक्स वर्कर फिर से इलाहाबाद पहुंच गईं लेकिन पुलिस ने वहां जाकर भी पड़ताल नहीं की। कुल मिलाकर जांच में हीलाहवाली चल रही है। इलाहाबाद से मुक्त कराई गईं सेक्स वर्कर में से दो अभी भी नारी निकेतन में हैं। पुलिस ने अभी तक उनसे भी कोई पूछताछ नहीं की है।

बता दें, बगैर आदेश के 21, 22 और 23 मई को 43 संवासिनियों और नौ बच्चों को छोड़ दिए जाने के आरोप में संरक्षण गृह की अधीक्षक गीता राकेश को गुरुवार को जेल भेजा गया था। उन्हें निलंबित भी कर दिया गया। शनिवार को उन्हें अंतरित जमानत मिल गई। इस मामले की जांच कर रहे सीओ छत्ता बीएस त्यागी का कहना है कि जांच चल रही है। जल्द ही नारी निकेतन से रिकार्ड लेकर संवासिनियों को ले जाने वाले लोगों के नाम पते तस्दीक किए जाएंगे।
विज्ञापन


इस मामले में दो अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं। नारी निकेतन की अधीक्षक गीता राकेश और डीपीओ स्मिता सिंह। अब इलाहाबाद के एसडीएम सदर पर भी कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि शासन पूरे मामले पर नजर रखे है। एसडीएम ने संवासिनियों को नारी निकेतन में रखे जाने की अवधि दो साल बढ़ाए जाने के लिए आदेश देरी से जारी किया। यह अवधि पूरी होने से 15 दिन पहले यानी पांच मई तक जारी हो जाना चाहिए था जबकि जारी किया गया 18 मई को।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें