मथुरा। सिटी और धार्मिक स्थलों पर चलने के लिए आईं बसों को आगरा और हाथरस तक दौड़ाया जा रहा है। यही हाल है मथुरा के जेनर्म बसों का। इसके चलते बसों की कमी धार्मिक स्थल और सिटी में साफ दिखने लगी हैं। श्रीराधा-कृष्ण के भक्तों और मथुरा की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
साल 2009 में जेनर्म की 60 बसें मथुरा को उपलब्ध कराई गईं थीं। यह बसें मथुरा सिटी और धार्मिक स्थलों पर दौड़ाई जानी थी। धार्मिक स्थलों में गोवर्धन, बरसाना, वृंदावन और बलदेव के लिए इन बसों का रूट तय किया गया था। इनमें कई रूट तो ऐसे हैं, जिन पर इन बसों का संचालन फिलहाल बंद कर दिया गया है। इन रूटों की बसों को आगरा और हाथरस दौड़ाया जा रहा है। जेनर्म की बसों के संचालन न होने से लोगों में भी काफी उबाल है।
बिना परमिट के दौड़ रहीं जेनर्म की बसें
मथुरा। बिना परमिट के आगरा, हाथरस, बाजना, मांट, नौहझील के लिए दौड़ाई जा रही जेनर्म की 59 बसें। इन जेनर्म की बसों से सरकार को लाखों रुपये की चपत भी लग रही है। बिना परमिट के दौड़ रही इन बसों को पकड़ने की जहमत आजतक एआरटीओ प्रवर्तन ने नहीं उठाई।
बलदेव में जेनर्म बस संचालन बंद से उबाल
मथुरा। बलदेव रूट पर जेनर्म की बसों का संचालन बिल्कुल बंद कर दिया गया है। इसके चलते लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी ज्ञानेंद्र पांडेय का कहना है कि बस संचालन न होने से दिक्कत हो रही हैं। विपिन कुमार का कहना है कि गोकुल तक कोई बस नहीं है। रोहताश ने बताया कि अगर शहर में यह बसें चलने लगें तो टेंपो वालों की मनमानी खत्म हो जाए।
प्राइवेट बस संचालकों से सेटिंग, हटाई जेनर्म बसें
मथुरा। जेनर्म की आगरा और हाथरस बसें दौड़ाने के पीछे चर्चा है कि कई मार्ग पर बसें हटाकर प्राइवेट बस संचालकों से जेनर्म अफसरों ने टाइअप कर लिया है। इसकी एवज में सुविधा शुल्क भी यह अफसर लेने में पीछे नहीं हैं। जेनर्म अफसरों की शिकायत करने के लिए लोग अब परिवहन मंत्री से शिकायत करेंगे।
हाथरस और आगरा रूट पर जेनर्म की बसों को दौड़ाया जा रहा है। यह जेनर्म की बनाई गई डीपीआर में रूट है। बसों को दौड़ाने में कोई घपला या फिर मनमानी नहीं है।
अनिल कुमार पांडेय, एआरएम जेनर्म